रोहतक। गांधी कैंप के बीचोंबीच से गुजरने वाले बहुचर्चित एलिवेटेड ट्रैक के साथ बन रही सड़क के 17 विस्थापितों को प्लॉट आवंटित हो गए हैं। वीरवार को नगर निगम ने ड्राॅ निकालकर इन लोगों को आशियाना बनाने के लिए प्लॉट सौंप दिए हैं। प्लॉट मिलने के बाद खुशी के बजाय विस्थापियों के चेहरों पर खामोशी व आंखों में सवाल नजर आए। एक परिवार ने कहा कि नगर निगम ने उनकी जमीन टुकड़ों में बांट दी। लेकिन, सरकार के आगे किसकी चलती है। एक महिला को ड्राॅ प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया।
शहर के बीच से रोहतक-पानीपत वाया गोहाना रेलवे लाइन गुजरती है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गांधी कैंप के बीच से ट्रैक हटाकर सुंदरपुर होते हुए मकड़ौली तक रेलवे बाईपास बनाने का प्रस्ताव पास हुआ, ताकि गांधी कैंप के बीचोंबीच माल रोड बन सके। 2013 में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने प्रोजेक्ट बदल दिया। गांधी कैंप के बीचोंबीच 300 करोड़ की लगात से एलिवेटेड ट्रैक बनाया गया। अब ट्रैक के साथ-साथ पश्चिम दिशा में पीडब्ल्यूडी की ओर से सड़क बनाई जा रही है। जबकि, पूर्वी दिशा में निगम बजरंग भवन से चिन्योट कॉलोनी तक सड़क बना रहा है। पूर्वी दिशा की सड़क के लिए निगम ने जमीन का अधिग्रहण किया है, जिसकी जद में 67 लोगों के मकान आ गए। पीजीआईएमएस से जमीन लेकर चिन्योट कॉलोनी में नगर निगम की ओर से उक्त मकान मालिकों को प्लॉट दिए जा रहे हैं।
ड्राॅ में 17 लोग ही पहुंचे
वीरवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे निगम आयुक्त कार्यालय में एसडीएम आशीष कुमार व संयुक्त आयुक्त विजय सिंह की अध्यक्षता में ड्राॅ प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें मात्र 17 लोग ही शामिल हुए। क्योंकि 67 विस्थापितों में से केवल 25 ने ही सहमति पत्र दिए थे। उनमें से 4 मुआवजा ले रहे हैं। 4 के कागजातों में कमी थी। 17 ने प्लॉट के लिए ड्राॅ में भाग लिया। पर्ची सिस्टम से ड्राॅ निकाला गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई गई। विस्थापितों से ही पर्ची निकलवाई गई।
महिला बोली-ड्राॅ में मेरा नाम क्यों नहीं
निगम आयुक्त कार्यालय पहुंची महिला रेनू गोयत ने कहा कि एक खसरा नंबर में उनकी जमीन में दो लोगों के नाम 2250 वर्गगज जमीन है, जबकि दूसरे पक्ष के 25 लोगों के नाम पर 1500 वर्गगज जमीन है। निगम के अधिकारियों ने एक खसरा नंबर होने की वजह से उनको ड्राॅ में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। कहा गया कि दूसरा पक्ष सहमति नहीं दे रहा है। रेनू गोयत ने कहा कि इसमें उनकी क्या गलती है। जवाब में निगम के संयुक्त आयुक्त विजय सिंह ने कहा कि जब तक दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनेगी, तब तक आपको ली गई जमीन का मालिक कैसे माना जाए।
27 गज जमीन ले ली, बाकी का क्या करेंगे
भू-स्वामी अमृत कपूर ने कहा कि उसकी पत्नी कृष्णा के नाम 90 वर्गगज जमीन ट्रैक के साथ-साथ है। उसमें से निगम ने 27 गज जमीन ली है, बाकी जमीन का वे क्या करें। निगम की तरफ से उसे एक प्लॉट चिन्योट कॉलोनी में दिया गया है।
छह प्लॉट मिलने पर भी छिक्कारा परिवार नाखुश
दिल्ली निवासी बलवंत छिक्कारा के बेटे आकाश छिक्कारा ने बताया कि उसके पिता के नाम ट्रैक के साथ-साथ 1400 वर्गगज जमीन थी। उसमें से निगम ने 700 वर्गगज जमीन ले ली। अब छह प्लॉट में मात्र 300 वर्ग गज जमीन चिन्योट कॉलोनी में मिली है। बजरंग भवन के पास मुख्य रोड से थोड़ी दूरी पर उनकी महंगी जमीन थी। आकाश ने कहा कि वे भी बार-बार रोहतक आकर थक गए थे। सरकार के आगे किसकी चलती है। देखते हैं कि बचे प्लॉट कितने टुकड़ों में रहे हैं।
यह मिले प्लाॅट
विस्थापित अलॉट प्लॉट नंबर
बलवंत सिंह 58,51,20,4,30,1
जगदीश 29
चंचल रानी 13
प्रेम सिंह 49
प्रशांत 18
कपिल देव 36
नरेश कुमारी 26
रामचंद्र 60
कृष्णा कुमारी 55
नरेंद्र सपड़ा 31
वीना रानी 37
अमन 25
वर्जन
पूरी पारदर्शिता से प्लॉट आवंटित कर दिए गए हैं। इसके लिए पर्ची सिस्टम अपनाया गया। बाकी प्लॉटों को लेकर नगर निगम आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा।
-आशीष कुमार, एसडीएम रोहतक
25 लोगों ने सहमति पत्र दिया था, उनमें से 17 को ड्राॅ के माध्यम से प्लॉट आवंटित कर दिए गए हैं। चार के कागजात पूरे नहीं थे, जबकि चार को मुआवजा दिया जाएगा। बाकी लोग भी सहमति पत्र जमा करवाएं, उनके लिए भी ड्राॅ करवाया जाएगा।
-विजय सिंह, संयुक्त आयुक्त नगर निगम
25सीटीके01... बलवंत छिकारा। अमर उजाला
25सीटीके01... बलवंत छिकारा। अमर उजाला
25सीटीके01... बलवंत छिकारा। अमर उजाला