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पढ़ें..... कोर्ट में यूं चली बहस

Tue, 22 Dec 2015 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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पीड़ित पक्ष के वकील- केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में शामिल कर सभी दोषियों को कम से कम मौत की सजा दी जाए।
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आरोपी पक्ष के वकील- सभी दोषियों को समान धाराओं में सजा न सुनाई जाए।  
पीड़ित पक्ष के वकील- सभी दोषी सामूहिक रूप से अपराध में शामिल रहे हैं। इसलिए समाज को संदेश देने के लिए दोषियों को मौत की सजा ही मिलना जरुरी है।

आरोपी पक्ष के वकील- पुलिस के पास पूरे केस में एक भी प्रत्यक्ष दर्शी गवाह नहीं है। यह पूरा केस परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर टिका हुआ है।  
पीड़िप पक्ष के वकील- पुलिस द्वारा अदालत में पेश किए गए चालान से स्पष्ट होता है कि इन दोषियों ने ही पीड़िता पर जुर्म ढहाकर उसे मौत के घाट उतारा।

आरोपी पक्ष के वकील- पुलिस ने अपनी जांच में दोषी पवन की भी डीएनए रिपोर्ट पेश कर दी। जबकि एमएलआर में पवन का सैंपल ही नहीं लिया गया।
इसके बाद आरोपी पक्ष के अन्य वकीलों ने भी अपनी दलील अदालत के सामने पेश की। साथ ही दोनों पक्षों की ओर से कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों के उदारण भी दिए गए।

कोर्ट में उठे पुलिस जांच पर सवाल-  
- जब दोषी पवन के सैंपल नहीं लिए गए तो उनकी डीएनए रिपोर्ट पुलिस ने कैसे पेश की।
- जिस कोठड़े में दोषियों से जुड़े साक्ष्य मिले थे, उसके मालिक ने 8 फरवरी को साफ सफाई की थी। जबकि पुलिस ने वहां से 12 फरवरी को बरामदगी की।

- पुलिस ने दोषियों के मोबाइल उनके  घर में रखे संदूक से बरामद किए। जबकि कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने दोषियों को पकड़ने का दावा किया था। 
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