अक्षत को कोचिंग सेंटर पर सम्मानित करते शिक्षक।
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मेरे सपने की राह का रोड़ा न बने इसलिए बेच दिया टीवी
डॉक्टर बनने का जुनून अक्षत पर इस कदर हावी है कि उसने घर में रखा टीवी सिर्फ इसलिए बेच दिया कि वह उसके सपने ही राह में रोड़ा न बन जाए। पिछले दो साल से उसने टीवी देखा न सोशल मीडिया से जुड़ा। यही नहीं, बैडमिंटन व चेस खेलने के शौकीन इस छात्र ने दो साल से खेल के मैदान में कदम तक नहीं रखा है। उसका लक्ष्य अपने बचपन के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने पर रहा।
इसके लिए दिन में आठ से दस घंटे पढ़ाई की। नीट में प्रदेश में दूसरा स्थान आया तो परिवार झूम उठा। यही नहीं, इसके बावजूद मन में खुशी नजर नहीं आई। उसका लक्ष्य इससे भी बेहतर रैंक हासिल करने का था। इसकी वजह उसे देश के सबसे बेहतर चिकित्सा संस्थान एम्स में दाखिला लेना है। अक्षत ने बताया कि वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है। इस बारे में कक्षा दस में सोचा था।
इससे पूर्व उसके दिल का ऑपरेशन हो चुका था। यहीं से कार्डियोलॉजिस्ट बनने की इच्छा घर कर गई थी। अपने ऑपरेशन की मुश्किलें देख दूसरों की राह आसान बनाने के लिए डॉक्टर बनने का फैसला किया। उसने बताया कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा हूं। आकाश संस्था में शिक्षकों ने अच्छा पढ़ाने के साथ मॉड्यूल पेपर ढंग से करना समझाया।
कक्षा में पढ़े हुए का रोजाना अभ्यास किया। साथ ही आत्मविश्वास कमजोर नहीं होने दिया। इसके लिए शिक्षकों ने लगातार प्रोत्साहित किया। इसी के चलते यह लक्ष्य हासिल कर पाया। पिता सुरेंद्र कुमार जींद के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी विषय के लेक्चरर हैं। मां सरला देवी गृहिणी हैं।