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Rohtak News: नए साल की पहली सफला एकादशी आज

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रोहतक। नए साल की पहली एकादशी उदया तिथि के अनुसार रविवार को मनाई जाएगी। पौष माह के कृष्ण पक्ष की पहली एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। सफला एकादशी पर व्रत और दान-दक्षिणा का खास महत्व रहता है। एकादशी के दिन व्रत कर द्वादशी पर ब्राह्मणों को भोजन कराने से व्रत पूरा माना जाने की मान्यता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। सभी एकादशियों के दिन किए जाने वाले व्रत ग्यारस के देवता भगवान विष्णु को समर्पित होते हैं। दूसरी एकादशी 21 जनवरी को कृष्ण पक्ष की पौष पुत्रदा एकादशी रहेगी।
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सफला एकादशी व्रत कथा
चंपावती नगरी के राजा महिष्मत का बड़ा पुत्र चरित्रहीन और देवताओं की निंदा करता था। जिस कारण राजा और अन्य पुत्रों ने उसका नाम लुम्पक रख उसे राज्य से बाहर निकाल दिया। मगर नाराज होकर उसने पिता की नगरी को लूट लिया। वन में एक पीपल के नीचे रहने लगा। पौष की कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन, उसके सर्दी के कारण प्राणहीन जैसे हालात हो गए। अगले दिन उसे चेतना प्राप्त हुई, लुम्पक का हृदय परिवर्तन हुआ। वन में वृक्षों से फल लेकर आया और पीपल के पेड़ की जड़ों पर फलों को रख उन्हें भगवान विष्णु को समर्पित किया। ऐसा करने से उसे सफला एकादशी का पुण्य प्राप्त हुआ और राज्य और पुत्र का वरदान मिला। उसके पिता ने लुम्पक को राज्य प्रदान किया। उसे मनोज्ञ नामक पुत्र हुआ। बाद में लुम्पक ने भगवान विष्णु के भजनों में लगकर मोक्ष प्राप्त कर लिया।

वर्जन

सफला एकादशी के दिन पूजा करने से संतान, घन और भूमि की प्राप्ति होती है। सभी एकादशियों के दिन जन्म लेने वाले बच्चे विनम्र स्वभाव के होते हैं। वह सत्य के रास्ते पर चलते हैं और दूसरों को भी इसकी शिक्षा देते हैं।
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- पंडित मनोज, दुर्गा भवन मंदिर।
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