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Rohtak News: फिंगर प्रिंट ज्यादा स्पष्ट दिखेंगे, एलईडी अधिक टिकाऊ होगी

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29सीटीके17- एमडीयू की छात्रा आ​शिमा का शोध का प्रयोगिक फोटो। स्रोत: एमडीयू
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रोहतक। अब फिंगर प्रिंट के पहले से बेहतर परिणाम मिल सकेंगे। एलईडी बाजार में नई क्रांति भी आएगी। यह दावा एमडीयू के भौतिकी विभाग की पीएचडी छात्रा आशिमा मखिजा ने अपने शोध में किया है। छात्रा ने विभाग की लैब में सीरियम डोप्ड नैनो कंपोजिट तैयार किया है। पाउडर के रूप में तैयार इस पदार्थ के शोध में फिंगर प्रिंट के तृतीय चरण के परिणाम बेहतर रहे हैं।
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यही नहीं, इस पदार्थ से तैयार एलईडी अधिक टिकाऊ होगी। इसकी वजह 800 डिग्री सेल्सियस तापमान तक इस पर किसी तरह का असर नहीं पड़ता है। इस शोध को यूरोप के रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री ने 11 जुलाई को आउट स्टेंडिंग अवाॅर्ड से नवाजा है।
फिंगर प्रिंट देखने में प्रयोग होता है
छात्रा आशिमा ने सीरियम डोप्ड नैनो कंपोजिट बनाया है। यह पाउडर फोरम में है। इसकी फोटो ल्यूूमिनेंसेंस प्रॉपर्टी व कंपोनेंट प्रॉपर्टी स्टडी की थी। इसकी एप्लीकेशन लटेंट फिंगर प्रिंट है। क्राइम सीन में नंगी आंखों से नजर नहीं आने वाले फिंगर प्रिंट देखने में प्रयोग होता है। फिंगर प्रिंट पर पाउडर डालने के बाद इस पर अल्ट्रावाॅयलेट रेज डाली जाती है। इस दौरान फिंगर प्रिंट हरे रंग में उभर आता है। बेहतर यह रहा कि फिंगर प्रिंट के तीन चरणों के सिक्योरिटी फीचर में सबसे अहम तीसरा चरण भी इस पदार्थ ने पास कर लिया है। तीसरे चरण के परिणाम बेहतर मिले हैं। फिंगर प्रिंट का हर हिस्सा या जोड़ साफ नजर आता है।
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एलईडी बनाने में भी उपयोगी
इस पदार्थ का उपयोग एलईडी बनाने में भी किया जाता है। इससे एलईडी की लागत कम होगी और अधिक समय तक भी चलेगी। फोटो ल्यूमिनेंसेंस मैटीरियल 800 डिग्री सेल्सियस तापमान तक सह सकता है। शोध में इस पर 800 से 1200 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का कोई असर नहीं हुआ। इससे एलईडी जल्दी खराब नहीं होगी।

पीएचडी छात्रा आशिमा ने सीरियम डोप्ड नैनो कंपोजिट तैयार किया है। पीले रंग का यह पाउडर अल्ट्रावॉयलेट रेज डालने पर ग्रीन नजर आता है। यह बेहतर फिंगर प्रिंट लेने के साथ एलईडी निर्माण में अधिक किफायती व लंबे समय तक चलने वाला है। यह हाइली स्टेबल पदार्थ बाहर प्रयोग होने वाले अन्य रसायनों से सस्ता व टिकाऊ है। नए कंपोनेंट से एलईडी बाजार में नई क्रांति आएगी।
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- डॉ. राजेश पूनिया, एचओडी, फिजिक्स, एमडीयू

29सीटीके17- एमडीयू की छात्रा आशिमा का शोध का प्रयोगिक फोटो। स्रोत: एमडीयू

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