रोहतक। अखिल भारतीय किसान सभा ने शुक्रवार को प्राकृतिक आपदा की प्रभावित फसलों के लिए 24 करोड़ रुपये मुआवजा न जारी होने के विरोध में लघु सचिवालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित किसान लघु सचिवालय के गेट पर भी चढ़ गए। करीब सवा दो घंटे तक खूब हंगामा हुआ।
उपायुक्त अजय कुमार ने सचिवालय के नीचे आकर किसानों को दस दिन में मुआवजा मंगवाने व इस साल के मुआवजे को जल्द मंगवाकर वितरित करने का आश्वासन दिया है। किसानों ने कहा कि 10 दिन बाद मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन को तेज करेंगे।
इससे पहले संगठन के प्रधान प्रीत सिंह की अध्यक्षता में किसान मानसरोवर पार्क में इकट्ठा हुए। किसान सभा राज्य महासचिव सुमित दलाल ने बताया की पिछले साल 70 से ज्यादा गावों में बारिश और जलभराव से गेहूं, सरसों की फसल खराब हो गई थी। इसका इस साल जनवरी माह में 24 करोड़ रुपये मंजूर होकर आया था। जो किसानों को वितरित न होने के चलते 31 मार्च को वापस चला गया। ढाई माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वापिस नहीं आया। इस साल ओलावृष्टि और बारिश से भगवतीपुर, खरेंटी, चांदी, टिटौली, कारौर, कलानौर और सांपला के दर्जनों गांवों में फसल नष्ट हुई है। उसका मुआवजे देने के लिए अब किसानों पर शर्तें थोपी जा रही हैं। जिन किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अनुमानित पैदावार डाली थी। ओलावृष्टि से काफी फसल नष्ट हो गई और बची फसल को किसानों ने बेच दिया। इसी वजह से इन किसानों का मुआवजा रद्द कर दिया। आधे से ज्यादा किसानों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रखा था और सरकार ने भी क्षतिपूर्ति पर डालने आदि की शर्तें हटा दी थी। अब मुआवजे से इन्कार क्यों किया जा रहा है। सरकार ने केवल कुछ किसानों और मात्र क्षतिपूर्ति पोर्टल वाले किसानों का खाते में डाला है। जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रदर्शन में इन गांवों के किसानों ने भाग लिया
प्रदर्शन के दौरान खरेंटी, भगवतीपुर, मायना, खरक, सुंडाना, आसन, पटवापुर, पाकस्मा, रिठाल, नौनंद, निंदाना, किलोई, खरावड़, कबूलपुर, मुंगान, समचाना, ककराना, मोरखेड़ी, बहुअकबरपुर, बखेता, सैमान, शिमली, कुलताना, भरान, आदि गावों से किसानों ने भाग लिया।