रोहतक। किसान अपनी जमीन से फसल पैदावार के साथ ऊर्जा उत्पादन भी कर सकता है। नई तकनीक का प्रयोग कर किसान फसल के साथ बिजली उत्पादन के जरिये वितरक भी बन सकता है। इससे उसे अपने उपयोग लायक निशुल्क बिजली भी उपलब्ध होगी। इसके लिए सौर ऊर्जा को तकनीक साथ प्रयोग किया जा सकता है। यह दावा एमिटी विवि के प्रोफेसर एवं डीआरडीओ के पूर्व निदेशक डॉ. वीके जैन ने किया है। वे वीरवार को एमडीयू के फिजिक्स विभाग की सात दिवसीय वर्कशॉप के पहले दिन रोहतक आए थे। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने का मंत्र साझा किया।
उन्होंने कहा कि तकनीक के जरिये किसानों की आय बढ़ाने की सोच के चलते एक प्रोजेक्ट तैयार किया। एमिटी विवि में 12 किलोवाट का एक प्रोजेक्टर लगाकर अध्ययन किया गया। यह प्रोजेक्ट सरकार को भी भेजा गया है। सरकार से मंजूरी के बाद किसानों के लिए आय बढ़ाना आसान होगा। इसके तहत सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। अब तक रेगिस्तान या बड़े खुले स्थानों पर ही सौर ऊर्जा के प्लांट लगाए जाते रहे हैं। हमने इसे खेती के लिए प्रयोग होने वाली जमीन पर लगाने की योजना बनाई है। इसकी बड़ी वजह सबसे अधिक जमीन खेती के लिए ही प्रयोग होना है। इससे फसल पर कोई असर नहीं होगा। इस बारे में प्रयोग करके देखा गया है।
अपने प्रयोग में एक खास डिजाइन तैयार किया। इसके तहत फसल उत्पादन के साथ उसी खेत में सोलर पैनल लगाए गए। इनकी छाया का फसल उत्पादन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा। फसल उत्पादन पहले की तरह रहा। साथ ही बड़े स्तर पर ऊर्जा उत्पादन भी हुआ। इसी तरह के प्रोजेक्ट लगाकर किसान बिजली उत्पादक बन सकता है। यह ऊर्जा बेच कर वह अपनी आय बढ़ा सकता है। साथ ही घरेलू उपयोग के लिए बिजली भी निशुल्क प्राप्त की जा सकती है। किसान एक माह में औसतन 10 हजार रुपये तक कमा सकता है। बड़ा प्रोजेक्ट लगाकर यह कमाई बढ़ाई भी जा सकती है। इसके लिए लागत बढ़ जाएगी। किसान 25 वर्ष चलने वाले इस प्रोजेक्ट से शुरू के आठ साल में खर्च निकालने के बाद शेष वर्षों में बगैर किसी लागत के ऊर्जा प्राप्त कर सकता है।
साफ पानी ले और बिजली भी बनाएं
डॉ. वीके जैन ने बताया कि अक्सर सेना के जवान जंगल, पहाड़ या मैदान में ड्यूटी पर होते हैं। यहां पीने के पानी के लिए वे बहते झरने, नदी या अन्य स्रोत से पानी ले लेते हैं। यह पानी साफ दिखाई देता है, मगर इसमें बैक्टीरिया, वायरस होता है। इससे जवानों के बीमार होने का खतरा बना रहता है। यहीं से एक सोच बनी कि एक ऐसा डिवाइस बनाया जाए जो पानी को साफ कर सके। इसके चलते एक टी-बैग की तरह का डिवाइस तैयार किया। इसमें कंक्रीट मिला। साथ सिल्वर के नैनो पार्टिकल डाले। इस एक डिवाइस को एक मिनट तक एक ग्लास पानी में घुमाने पर इसके बैक्टीरिया, वायरस खत्म हो जाते हैं। इस डिवाइस को कई वर्षों तक प्रयोग कर सकते हैं। यह आइडिया गंगा से लिया। पिछले चार साल से यह तकनीक प्रयोग कर रहे हैं। गंदे पानी से बिजली बनाना भी संभव है। इसके लिए नैनो मेटिरियल से दो स्पेशल इलेक्ट्रॉल तैयार किए। इसे बीकर में डालने पर बिजली मिलती है। यह एक प्रकार का सेल बन जाता है। इससे कमरे में एलईडी पैनल से रोशनी पैदा की। यह एक सस्ती व बेहतर तकनीक है। अभी इसका व्यवसायिक प्रयोग नहीं किया जा रहा है।