कनीना। राज्य सरकार किसानों की समस्या से बेखबर है। आलम यह है कि किसानों के लिए चलाई जाने वाली फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि बैंक द्वारा प्रतिवर्ष फसल बीमा के लिए राशि ली जाती है और इंश्योरेंश कंपनी द्वारा बीमा किया गया है, लेकिन आज तक किसी किसान को कपास बाजरे फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर फसल बीमा योजना के तहत किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर किसानों में रोष है। बता दें कि विभिन्न बैंकों की ओर दौंगड़ा अहीर क्षेत्र के किसानों की फसलों का बीमा किया है। किसानों का आरोप है कि ओलावृष्टि की रिपोर्ट के बावजूद बैंक व बीमा कंपनी किसानों की आंखों में धूल झोंक लाखों रुपये का चूना लगा दिया। किसान बैंक व बीमा कंपनी का चक्कर लगाते-लगाते थक जाते हैं लेकिन मुआवरा राशि नहीं मिल पाती। ओलावृष्टि की वजह से किसानों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है लेकिन अभी जो इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से सर्वे की जो लिस्ट आई है उसमें गांव के कुछ ही किसानों के नाम शामिल हैं। जबकि पंजाब नेशनल बैंक दौंगड़ा अहीर तथा अन्य बैंकों में जिन किसानों ने केसीसी बनवा रखा है उनमें ज्यादातर किसानों का नाम इंश्योरेंस वाली लिस्ट में नहीं आया है।
किसान शेर सिंह प्रधान, सत्यपाल, विक्रम, हरिसिंह ने बताया किसानों की कहीं कोई सुनवाई नहीं होती बैंक व बीमा कंपनी वालों को किसानों के हित से कोई मतलब नहीं है। प्रशासन भी इनकी नकेल नहीं कस पाता है। किसान परेशान हैं, ऐसे फसल बीमा से क्या फायदा कि उसका लाभ ही नहीं मिले। बीमा के लिए बैंक वाले प्रीमियम काट लेते हैं लेकिन ओलावृष्टि या अन्य आपदा होने पर टरकाने लगते हैं। ऐसे में बैंक व बीमा कंपनी की मिलीभगत से किसानों के हित के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कलवाड़ी, भालखी, दौंगड़ा अहीर, बेवल, दौंगड़ा अहीर के किसानों ने बताया, केसीसी के माध्यम से बीमा के नाम पर प्रीमियम राशि काट ली जाती है, लेकिन आपदा पडने पर किसानों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। किसान बैंक का चक्कर लगाकर परेशान हैं पर उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिल रहा है।
महेंद्रगढ़ जिले में लगभग 34 हजार किसानों के आवेदन आए हैं। आवेदनों को पोर्टल पर अपलोड करने का काम 19 मार्च से चल रहा है। जिन किसानों ने आवेदन किया है उन सभी का सर्वे किया जाएगा। किसानों को मायूस होने की आवश्यक नहीं है।
बलवंत सहारण, कृषि उप निदेशक