इस पर ग्रामीणों ने अपनी सहमति जताई। जमीन अधिग्रहण करने के सवाल पर सीएम ने कहा कि यह एक लंबी प्रक्रिया है, ऐसे में बाजार भाव पर जमीन लेना ही सही रहेगा। सीएम ने कहा कि यदि आप लोग जमीन देने को तैयार हो तो आज ही मैं डीसी को आदेश दे देता हूं।
मनेठी में एम्स की फाइल
सीएम मनोहर लाल ने वर्ष 2015 में बावल में आयोजित जनसभा के दौरान एम्स निर्माण की घोषणा की थी। चार साल बाद मसानी बैराज पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम ने खुद ही मनेठी एम्स निर्माण की संभावनाओं पर विराम लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि इसकी घोषणा दबाव में कराई गई थी।
इसके बाद मनेठी के ग्रामीणों ने दो अक्तूबर 2018 से लगातार 127 दिन धरना दिया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में मनेठी एम्स को स्वीकृत करते हुए बजट अलॉट किया गया। प्रधानमंत्री ने भी कुरुक्षेत्र रैली से मनेठी में एम्स निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन इसके बाद वन सलाहकार समिति ने प्रस्तावित स्थल को वन आरक्षित क्षेत्र बता रोक लगा दी थी।
अरावली वन क्षेत्र है की नहीं, जांच के आदेश
जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने सीएम के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि एम्स निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन अरावली क्षेत्र में नहीं आती है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। सीएम ने भी ग्रामीणों की बात को मानते हुए प्रस्तावित स्थल अरावली वन क्षेत्र में आता है या नहीं इसकी जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि आप लोग जिस अफसर का नाम बताओगे, उससे ही जांच कराई जाएगी।