संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। वैश्य शिक्षण संस्थान की कार्यकारिणी अपने ही प्रधान के खिलाफ हो गई है। संस्था महासचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य ने प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पांच करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं समेत अनेक गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें धनराशि का नुकसान, प्राचार्यों का सदस्यों के साथ अशिष्ट व्यवहार, मनमर्जी चलाने व अन्य समस्याएं शामिल हैं। इधर, प्रधान ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि हर काम नियम और गवर्निंग बाॅडी से पास हुआ है। यहां उद्योगपति राजेश जैन और मेयर मनमोहन गोयल भी उपस्थित रहे।
रविवार को शीला बाईपास स्थित एक होटल में संस्था महासचिव राजेंद्र बंसल, कोषाध्यक्ष डॉ. चंद्र गर्ग व अन्य सदस्यों ने संस्था में महीनों से हो रहे नुकसान को लेकर प्रधान को दोषी ठहराया। महासचिव ने कहा कि संस्था में सितंबर 2022 में शुरू हुए नए कार्यकाल के बाद से अब तक लगभग 85 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वर्ष 2000 से 2021 में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को राशि नहीं दी गई, जबकि 1.5 करोड़ रुपये कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मनमर्जी से वितरित किए गए हैं। इस मौके पर उप प्रधान दीपक जिंदल, डॉ. आरके चौधरी, राजेश मित्तल, विजय तायल, सुभाष तायल, राकेश गर्ग, सुशील जैन व अन्य सदस्य मौजूद रहे।
संस्था में हो रही परेशानियों के कारण संस्था का नाम धूमिल हो रहा है। प्रधान की मनमर्जी व फैसलों पर चेता दिया गया है। प्रधान व्यवहार व फैसलों में बदलाव लाएं। यही बेहतर है।
- डॉ. चंद्र गर्ग, कोषाध्यक्ष, वैश्य संस्था।
संस्था हित में फैसला ही सभी का लक्ष्य रहे संस्था से ऊपर कुछ नहीं होना चाहिए। एक दूसरे पर विश्वास करते हुए बिना किसी विवाद के संस्था हित में फैसला लेना ही सभी का लक्ष्य होना चाहिए। संस्था में कैंसर की भांति बीमारी घोलने वाले का इलाज किया जाए।
- राजेश जैन, संस्था सदस्य।
कार्यकारिणी के कुछ पदाधिकारी बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। संस्था में कोई भी काम नियमों के विरुद्ध या गवर्निंग बाॅडी में पास किए बगैर नहीं किया गया है। किसी को एक रुपया भी गलत नहीं दिया गया है। कर्मचारियों के वेतन के लिए भी विरोधी पक्ष ही दोषी हैं। वहीं उनका वेतन रोके हुए हैं।
नवीन जैन, प्रधान, वैश्य शिक्षण संस्था।