रोहतक। भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में रहे नगर निगम में सख्ती बरतनी शुरू हो गई है। निगम प्रशासन ने पत्र जारी करके तीन दिन के अंदर 77 अधिकारी व कर्मचारियों को तीन दिन में एपीआर यानी वार्षिक प्रॉपर्टी रिपोर्ट पोर्टल पर भरने का आदेश दिया है। सूची में निगम में एटीपी जितेंद्र नेहरा का नाम भी शामिल है, जिसे विजिलेंस ने 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
प्रदेश सरकार ने हिदायत दी थी कि हर साल अधिकारी व कर्मचारी को अपनी संपत्ति का ब्योरा सरकार को देना होगा। इसलिए निगम प्रशासन की ओर से हर वित्त वर्ष के आखिर में सालाना एपीआर मांगी जाती है। वित्त वर्ष 2022-23 की एपीआर अब तक नहीं भरी गई है। इसके चलते निगम के लेखा अधिकारी ने निगम आयुक्त को पत्र लिखा है। बताया है कि 77 अधिकारी व कर्मचारियों को 17 जुलाई तक एपीआर भरनी है।
आयुक्त व निगम आयुक्त को छोड़कर सभी अधिकारियों के नाम सूची में शामिल
शुक्रवार को जारी किए गए पत्र में निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा व संयुक्त आयुक्त विजय सिंह को छोड़कर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।
बिल्डिंग व टैक्स ब्रांच पर लग चुके हैं भ्रष्टाचार के आरोप
निगम की बिल्डिंग व टैक्स ब्रांच भ्रष्टाचार को लेकर आरोपी में रही है। दिसंबर 2022 में व्यापारी नेता गुलशन निझावन ने टैक्स ब्रांच के क्लर्क पर पांच हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। इसके लिए पूरा स्टिंग ऑपरेशन किया गया। संदीप के खिलाफ आर्य नगर थाने में भ्रष्टाचार का केस दर्ज है। वहीं, 31 मई 2023 को विजिलेंस ने निगम के एटीपी जितेंद्र नेहरा, नक्शानवीस त्रिलोकचंद सहित तीन को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि बिल्डर से अवैध कॉलोनी में तोड़फोड़ न करने की एवज में 10 लाख रिश्वत ली गई। आरोपी अभी न्यायिक हिरासत के चलते जेल में हैं।
सरकार की हिदायतों के तहत हर साल अधिकारी व कर्मचारी को एपीआर भरना अनिवार्य है। अभी तक किसी ने साल 2022-23 की वार्षिक प्रॉपर्टी रिटर्न नहीं भरा है। इसलिए 17 जुलाई तक एपीआर पोर्टल पर भरने का निर्देश दिया गया है।
धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त नगर निगम