रोहतक। हिंदी बोलना सरल है। यही हमारी बोलचाल की भाषा भी है। हिंदी में सुनाए गए फैसले समझना आसान हैं। आमजन को इन्हें समझने के जरूरत न पड़े, इसीलिए एसडीएम अदालत में सभी फैसले हिंदी में सुनाए जाते हैं। शुरू से यही व्यवस्था बनी हुई है। एसडीएम कोर्ट में हर वर्ष करीब 500 फैसले हिंदी में सुनाए जाते हैं। एसडीएम राकेश कुमार अपनी अदालत में इस व्यवस्था को गंभीरता से अमल में लाते हैं।
उन्होंने कहा कि अदालती मामलों से अलग कुछ ऐसे विवाद होते हैं, जिन्हें एसडीएम कोर्ट में सुलझाया जाता है। इसमें पीड़ित से अदालत सीधे संपर्क रखती है। यहां व्यक्तिगत रूप से पीड़ित अपनी बात रखता है। वह साधारण तरीके से अपनी बात कह सकता है। इस पर सुनवाई या कार्रवाई की प्रक्रिया को भी वह खुद समझ सकता है।
वर्ष 2018 में खरखौदा से सुनाया था पहला फैसला
एसडीएम अदालत के तौर पर अपना पहला फैसला वर्ष 2018 को खरखौदा में सुनाया था। हिंदी में फैसले देने के सफर की शुरुआत के बाद से सिलसिला जारी है। अब रोहतक में पीड़ितों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा उपायुक्त अदालत में भी करीब 90 प्रतिशत फैसले हिंदी में सुनाए जाते हैं।
कार्यालय संबंधी कार्य भी हिंदी में करने पर जोर
बदलते दौर में तकनीक ने काफी कुछ बदला है। इसमें कंप्यूटर, हिंदी में टाइपिंग की सुविधा उपलब्ध कराने वाले मोबाइल फोन व अन्य उपकरण मुख्य हैं। इनसे कार्यालय संबंधी कार्य में बड़ा बदलाव आया है। हिंदी को कामकाजी भाषा के रूप में भी प्रयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी पत्र या निर्देश हिंदी में भी जारी होने लगे हैं।