रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के सेंट्रल एनिमल हाउस के तत्वावधान में शनिवार को एथिक्स एंड नेसेसिटी ऑफ लेबोरेट्री एनिमल एक्पेरिमेंटशन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डाॅ. अनिल मंधानी ने बतौर मुख्यातिथि आईएचटीएम कांफ्रेंस हॉल में कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
मुख्यातिथि ने कहा कि नई दवा विकसित करने और अन्य उत्पादों की सुरक्षा का परीक्षण करने के लिए पशुओं पर प्रयोग करते हुए नैतिकता का ख्याल रखा जाए। पशु प्रयोगों को यथासंभव मानवीय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जानवरों पर प्रयोगों को वैकल्पिक तकनीकों से बदलने की जरूरत है। संपूर्ण जानवर के बजाए कोशिका संवर्धन का प्रयोग, कंप्यूटर मॉडल उपयोग पर बल देने की बात उन्होंने रखी।
कुलपति ने कहा कि रिसर्च में एनिमल एक्सपेरिमेंट के दौरान उनके दर्द और कष्ट को कम करने की जरूरत है। प्रयोग करते समय जानवरों की दर्द और पीड़ा को कम करना एक नैतिक आवश्यकता है।
आईजीआईबी नई दिल्ली के डाॅ. विजय पाल सिंह, जेएनयू नई दिल्ली के डाॅ. दिनेश के यादव, आईबीएलएस नई दिल्ली की डाॅ. अनुपमा पराशर, एनबीआरसी, मानेसर के डाॅ. इंद्रजीत यादव ने बतौर रिसोर्स पर्संस संगोष्ठी में संबोधन किया और प्रयोगों में जानवरों के उपयोग एवं नैतिकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं बारे विस्तार से बतया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के को-कंवीनर प्रो. अनिल कुमार छिल्लर ने सेमिनार की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी की कन्वीनर डीन, फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज प्रो. राजेश धनखड़ ने फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज में संचालित पाठ्यक्रमों, शोध गतिविधियों, उपलब्ध शोध सुविधाओं बारे जानकारी दी। उन्होंने एनिमल एथिक्स के महत्व बारे जानकारी दी। आयोजन सचिव डॉ. हरि मोहन ने कार्यक्रम का समन्वयन किया। उद्घाटन सत्र में प्रो. गोविंद सिंह ने तथा समापन सत्र में डा. सुधीर के कटारिया ने आभार जताया। डाॅ. ऋतु पसरीजा ने मंच संचालन किया। इस मौके पर डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. अरुण नंदा, डीन फार्मास्यूटिकल साइंसेज प्रो. हरीश दुरेजा आदि उपस्थित रहे।