रोहतक। मूल्य आधारित जनसंपर्क प्रक्रिया अपनाने व जन केंद्रित जनसंपर्कीय प्रणाली विकसित करने की जरूरत है। यह आह्वान रविवार को गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के प्रोफेसर डाॅ. विक्रम कौशिक ने किया। वह महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के उपलक्ष्य में मीडिया विशेषज्ञ के रूप में बोल रहे थे। राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम का आयोजन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग व जनसंपर्क कार्यालय की ओर किया गया।
उन्होंने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की ओर से सृजित सामग्री की विश्वसनीयता व दुष्प्रचार की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वास जीतना, विश्वसनीयता, सत्य-तथ्य आधारित सामग्री का संप्रेषण जनसंपर्क का फोकस होना चाहिए। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने कहा कि भारत में प्राचीन समय से वाचिक परंपरा रही है। जनसंपर्कीय कार्य वाचिक परंपरा के तहत संचालित किया जाता रहा।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन प्राध्यापक और निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने किया। उन्होंने राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस मनाने के इतिहास व लोकतंत्र में जनसंपर्क के योगदान को रेखांकित किया। आभार प्रदर्शन प्राध्यापक डाॅ. नवीन कुमार ने किया। इस मौके पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मताधिकार करने की शपथ भी सामूहिक रूप से ली गई।