28सीटीके10..आचार्य मनोज मिश्र। संवाद
रोहतक। अजा एकादशी व्रत भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर रखा जाता है। सनातन धर्म में अजा एकादशी व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना कर व्रत किया जाता है। मां लक्ष्मी की भी प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और कथा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन व्रत करने से जीवन में समृद्धि और खुशियां आती हैं।
दुर्गा भवन मंदिर के आचार्य मनोज मिश्र ने कहा कि इस बार अजा एकादशी पर विष्णु पूजा पर विशेष संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दुर्लभ संयोग में आराधना करने पर दोगुना फल प्राप्त होगा। इस वर्ष अजा एकादशी 29 अगस्त 2024 को है।
शुभ मुहूर्त व पारण का समय
एकादशी तिथि 29 अगस्त को मध्य रात्रि 1 बजकर 19 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इसका समापन 30 अगस्त को मध्य रात्रि 1 बजकर 37 मिनट पर होगा। ऐसे में अजा एकादशी का व्रत उदया तिथि के अनुसार गुरुवार 29 अगस्त को रखा जाएगा। आज तीन योग बन रहे हैं। एक वीरवार को गुरु के पूजा दिन एकादशी व्रत का संयोग बन रहा है। दूसरा सुबह 6 बजकर 18 मिनट तक सिद्धि योग है। वहीं तीसरा योग शाम 4 बजकर 39 मिनट से 30 अगस्त को सुबह 5 बजकर 58 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग पूजा-आराधना के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं। वहीं पारण का समय 30 अगस्त को सुबह 7 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
अजा एकादशी के दिन क्या करें
- स्नान व साफ वस्त्र पहन व्रत का संकल्प लें।
- कथा अवश्य सुनें।
- भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें।
अजा एकादशी व्रत के दिन क्या न करें
- व्रत के दौरान चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- तामसिक भोजन का परहेज करना चाहिए।
- व्रत के दिन चुगली करने से बचना चाहिए।
- बड़े-बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए।