नारनौल। सर्दी के मौसम में पाले से खराब हुई सरसों का दर्द अभी किसान नहीं भूले थे कि एक बार फिर इंद्र देवता आसमान से बूंदे गिराना शुरू हो गए हैं। वीरवार सायं को जिले में हुई बूंदाबांदी के बाद ओलावृष्टि हुई। इससे किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है। क्योंकि क्षेत्र में कई जगहों पर सरसों की फसल की कटाई हो चुकी है, वहीं कई जगहों पर कटाई चल रही है। अगर ऐसे में तेज बारिश व ओलावृष्टि होती है तो वह सरसों व गेहूं दोनों फसलों के लिए काफी नुकसानदायक होगी। किसान पहले ही सरसों की फसल में पाले की मार झेल चुका है। अब बारिश की मार भी किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार ने किसानों को पाले से खराब हुई फसल का अभी तक कोई मुआवजा भी नहीं दिया है। अगर, अब बारिश की मार गिरी तो किसान बुरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार वीरवार दोपहर बाद आसमान में तेज हवाओं के साथ काले बादल छाने लगे। करीब चार बजे नारनौल क्षेत्र के आसपास तेज गर्जना के साथ हल्की बारिश शुरू हो गई। वहीं अटेली व नांगल चौधरी में भी बारिश हुई है। बारिश होने से सरसों की कटाई गई फसल भीग गई। किसान रामौतार, जगमाल, रामरतन, हवासिंह, घीसाराम ने बताया कि बारिश होने से खलिहान में लगी सरसों की फसल भीग गई। सरसों की कटी हुई फसल भीगने से उसे दोबारा सुखाने में उन्हें काफी मेहनत करने पड़ेगी। कहा कि मौसम विभाग ने अभी 21 मार्च तक बारिश की संभावना जताई है। मौसमी गड़बड़ी की संभावना को देखते हुए किसानों ने फसल कटाई कार्य को तेज कर दिया है। किसान चाहता है कि जल्दी से जल्दी सरसों की कटाई करके उसे खलिहान में एकत्रित कर लिया जाए ताकि गड़बड़ी के दौरान नुकसान कम हो सके। वहीं खलिहान में लगा चुके किसान जल्दी से जल्दी थ्रेसिंग करवाना चाह रहे हैं, लेकिन मजदूरों की कमी के चलते किसान भी बेबस नजर आ रहा है।
तापमान में आई कमी
राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि मौसम में आये बदलाव के चलते तेज गर्मी व बढ़ते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। वीरवार को नारनौल का अधिकतम तापमान 32.0 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री दर्ज किया गया है। बुधवार के मुकाबले अधिकतम तापमान में 1.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान में 1.9 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 22 मार्च के बाद दोबारा तापमान में बढ़ोत्तरी होगी। वहीं मौसम में बदलाव के चलते मौसमी बीमारियों के साथ मच्छरों की भी भरमार शुरू हो गई है।