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एक करोड़ तक के भ्रष्टाचार के मामले में मंडलायुक्त को कार्रवाई करने का अधिकार : उपायुक्त

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जिला उपायुक्त यशपाल ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का उद्देश्य विभिन्न सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक क्षेत्र के व्यवसाय में भ्रष्टाचार को खत्म करना है। भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए अभियान को गति देने व प्रशासन में प्रभावशीलता लाने के उद्देश्य से जिलास्तर पर अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला सतर्कता समिति का गठन किया गया। इस सतर्कता समितियों के पास हरियाणा सरकार के किसी भी विभाग, सार्वजनिक कार्यालय के कार्य और संचालन का औचक दौरा कर जांच करने का अधिकार होगा। एक करोड़ तक के भ्रष्टाचार के मामले में मंडलायुक्त का कार्रवाई करने का अधिकार है।
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उन्होंने बताया कि प्राधिकरण सरकारी कार्यों के सम्मान और विस्तार के रूप में यह सरकार की तरफ से कार्य करने वाली किसी भी संस्था के लिए विस्तारित होगा। यह केवल सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार की गतिविधियों में शामिल लोकसेवकों पर मुकदमा चलाकर उन्हें दंडित करना भी शामिल है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत राज्य सरकार के किसी भी विभाग के ग्रुप बी, सी व डी के कर्मचारी के साथ-साथ सरपंच, पीआरआई, यूएलबीएस के सदस्य एक करोड़ तक के भ्रष्टाचार के मामले में मंडलायुक्त को संबंधित शक्तियां प्रदान की गई हैं।
सतर्कता समितियों के जांच के प्रमुख क्षेत्र
उपायुक्त ने बताया कि स्कूल, पीएचसी और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं, राजस्व विभाग कार्यालयों, शहरी स्थानीय निकायों, विकास और पंचायत कार्यालयों, परिवहन विभाग, पुलिस स्टेशनों व अन्य स्थानों में कर्तव्यों के कदाचार, लापरवाही की राशि को शामिल किया गया है। पब्लिक डीलिंग यूएलबी के इंजीनियरिंग विंग सहित इंजीनियरिंग विभागों के किसी भी निविदा के तहत कार्यों सहित सिविल कार्यों व अन्य कार्यों के निष्पादन की जांच सतर्कता समितियों के पास किसी भी सरकारी विभाग से किसी भी तकनीकी अधिकारी को निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए संबद्ध करने का अधिकार होगा। समितियों के पास परीक्षण के लिए नमूने एकत्र करने का अधिकार होगा। निर्धारित प्रक्रिया जमाखोरी और कालाबाजारी की गतिविधियों की जांच और रोकथाम की अनुमति होगी तथा फसल खरीद सीजन के दौरान खाद्यान मंडियों का निरीक्षण व भौतिक सत्यापन करना भी शामिल होगा।
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