कलानौर। बदलते मौसम में बीमारियां घेरने शुरू कर दी हैं। इस मौसम में खांसी-जुकाम, बुखार, दस्त आदि के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
कलानौर नागरिक अस्पताल में बुधवार को ओपीडी का जायजा लेने पर बदलते मौसम की वजह से लोगों के अधिक बीमार होने का मामला सामने आया। सितंबर माह में 6461 मरीज व तकरीबन 3500 अक्तूबर के आधे माह में ओपीडी का दरवाजा खटखटा चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा मरीज खांसी, जुकाम, बुखार, दस्त, बदन दर्द के मरीज पहुंचे हैं। वहीं रात्रि आपातकालीन में 870 मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं, जो कि पेट दर्द, बीपी, घायल हैं।
वरिष्ठ चिकित्सक अधिकारी डॉ. कमला वर्मा ने बताया कि 50 बेड का अस्पताल है। यहां काफी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी प्रकार के टेस्ट अस्पताल कि लैब में ही उपलब्ध हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी सभी दवाइयां उपलब्ध हैं। आशा वर्कर की ओर से टीकाकरण सेंटर पर महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।
एक ही डॉक्टर के भरोसे 400 मरीज
महम। उपमंडल नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीज घंटों इंतजार करते हैं। अस्पताल में डेंगू, मलेरिया, टीबी, त्वचा रोग, हड्डी रोग, आंख, नाक-कान, गला, फिजिशियन से संबंधित हर रोज लगभग 400 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सा अधिकारियों की कमी के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की ड्यूटी तो है, लेकिन इलाज के अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में ड्यूटी लगाने, बार-बार उच्चाधिकारियों के साथ बैठक होने के कारण डॉक्टरों की कमी हो जाती है। कई बार एक ही डॉक्टर को 400 मरीजों की ओपीड़ी देखनी पड़ती है।
अस्पताल में इलाज के लिए आए जयपाल ने बताया कि उनकी बेटी को कई दिन से बलगम वाली खांसी, जुकाम है। पर्ची बनवाकर डॉक्टर के पास दे रखी है, लेकिन काफी देर बाद भी नंबर नहीं आया। अब वापस जाने के लिए मजबूर हूं। ममता ने बताया कि पैर की नस ब्लॉक है। इसके कारण पैर में दर्द रहता है। जब तक दवा खाती हूंं पता नहीं चलता। उसके बाद फिर से वही शिकायत हो जाती है। आधा घंटे से खड़ी हूं। धर्मबीर ने बताया कि चार दिन से जुकाम है। दवा लेने आया था। नंबर ही नहीं लग रहा।
अस्पताल में नहीं डेंगू, थायराइड व एचआईवी जांच की सुविधा
कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में डेंगू, थायराइड व एचआईवी जैसी बीमारियों की जांच की सुविधा नहीं है। मरीज का सैंपल लेकर रोहतक भेज देते हैं। मरीज का फोन नंबर दर्ज करते हैं। पॉजिटिव पाए जाने पर संपर्क किया जाता है।
फार्मासिस्ट और विशेषज्ञों की कमी झेल रहा अस्पताल
अस्पताल में कोई फार्मासिस्ट नहीं है। इनके स्थान पर स्टाफ नर्स काम करती है। अस्पताल में चमड़ी रोग विशेषज्ञ, नाक-कान, गला रोग विशेषज्ञ, आंख रोग विशेषज्ञ, गायनोलॉजिस्ट, फिजिशियन की तैनाती न होने से रोगियों को उचित उपचार नहीं मिल रहा।
बदलता मौसम पड़ रहा सेहत पर भारी
सांपला। सरकारी और निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को करीब 250 की ओपीडी रही। सुबह ज्यादा मरीज भीड़ होने की वजह से कमरे के बाहर बैठकर इंतजार करना पड़ा। बता दें कि सांपला सामुदायिक अस्पताल में रोजाना 250-300 की ओपीडी होती है। बुधवार को बुखार के मरीजों में बढ़ोतरी मिली। डॉ. विवेक, डॉक्टर विशाल ने बताया कि चार-पांच दिनों से सामान्य ओपीडी में भीड़ बढ़ी है। इनमें 40 प्रतिशत से ज्यादा मरीज मौसमी बीमारियों के पाए गए हैं। डॉक्टर का कहना है कि जब भी मौसम बदलता है तो तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे वायरस शरीर को जल्दी संक्रमित कर देता है।
कलानौर 01..मरीज को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सक अधिकारी डॉ कमला वर्मा। संवाद
कलानौर 01..मरीज को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सक अधिकारी डॉ कमला वर्मा। संवाद