रोहतक। अवैध काॅलोनी में तोड़फोड़ न करने की एवज में 10 लाख रिश्वत लेने और मांगने के आरोप में गिरफ्तार नगर निगम के सहायक नगर योजनाकर (एटीपी) जितेंद्र नेहरा के खिलाफ नगर निगम ने विभागीय जांच पूरी कर ली है। सोमवार को निगम आयुक्त की तरफ से मुख्यालय रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी। इसके बाद मुख्यालय की तरफ से भ्रष्टाचार के आरोपी एटीपी को सस्पेंड किया जा सकता है।
उधर, विजिलेंस की तरफ से एटीपी, नक्शानवीस त्रिलोकचंद शर्मा व तीसरे आरोपी योगेश को 28 जून को अदालत में पेश किया जाएगा। साथ ही अदालत आरोपी नक्सानवीस के कार्यालय के डीवीआर को लेकर निर्णय लेगी, जिसे बचाव पक्ष की तरफ से वापस मांगा गया है। बचाव पक्ष का तर्क है कि विजिलेंस ने जब कार्यालय में छापा मारा, पूरी घटना कैमरे में कैद है। आरोपी नक्शानवीस ने रिश्वत नहीं ली। ऐसे में विजिलेंस से डीवीआर दिलवाई जाएं, कहीं उसकी बेगुनाही के सुबूत नष्ट न कर दिए जाएं। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।
31 मई को राजेंद्र नगर निवासी राजेश पुनिया ने शिकायत दी थी कि उसने न्यू बाईपास के नजदीक बोहर गांव के पास नौ एकड़ जमीन में कॉलोनी विकसित की है। बिल्डर का आरोप था कि नगर निगम के एटीपी जितेंद्र नेहरा कॉलोनी में तोड़फोड़ न करने की एवज में छोटूराम चौक स्थित नक्शानवीस त्रिलोकचंद शर्मा के माध्यम से 40 लाख रुपये मांग रहा था। अब दोनों पक्षों के बीच 22 लाख रुपये सौदा तय हुआ। साथ ही 10 लाख रुपये अभी दिए जाने हैं। विजिलेंस ने केस दर्ज कर नक्शानवीस त्रिलोकचंद शर्मा के छोटूराम चौक स्थित कार्यालय पर दबिश दी, जहां उसे 10 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। साथ ही उसके साथी योगेश के साथ-साथ एटीपी जितेंद्र नेहरा को भी काबू किया गया। तभी से तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत के चलते जेल में बंद हैं।
नगर निगम कार्यालय में दलाल घूमने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। आम लोगों से आग्रह है कि वे किसी दलाल के चक्कर में न पड़े। अगर कोई पैसे मांगता है या काम नहीं करता तो उसकी शिकायत करें।होगी।
धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त नगर निगम