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Rohtak News: भीम अवाॅर्ड का नाम लक्ष्मी सहगल के नाम पर करने की मांग

Fri, 21 Jul 2023 02:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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रोहतक। हिम्मत संस्था के तत्वावधान में वीरवार को जाट भवन में कैप्टन लक्ष्मी सहगल के स्मृति दिवस पर खेल पंचायत आयोजित की गई।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन लक्ष्मी सहगल की बेटी और कानपुर की पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल शामिल हुईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता छह सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की। कार्यक्रम की शुरुआत में रागिनी गायक गुलाब सिंह खंडेलवाल व निकिता निर्भी ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। हिम्मत संस्था की अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय भीम अवाॅर्डी जगमति सांगवान ने महिला खेल पंचायत का मुख्य प्रस्ताव रखा और सविता व उषा ने संचालन किया। कोषाध्यक्ष प्रोफेसर अमिता ने भीम अवाॅर्ड का नाम महिला खिलाड़ियों के लिए कैप्टन लक्ष्मी सहगल के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा। शकुंतला जाखड़ ने मणिपुर में हो रही हिंसा व भाजपा सरकार की चुप्पी के खिलाफ प्रस्ताव रखा। महिला पंचायत में निर्णय लिया गया कि सरकार संगठन की मांगें नहीं मानती तो लोकसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र में इन मुद्दों को स्थान दिलवाने के लिए आंदोलन चलाया जाएगा।
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प्रोफेसर शमशेर सिंह कादियान, पूर्व जिला खेल अधिकारी एवं पूर्व हाॅकी खिलाड़ी सुंदर सिंह, पूर्व उपनिदेशक खेल विभाग राजबीर सिंह बजाड़, साक्षी मलिक की मां सुदेश मलिक, एक्स सर्विसमैन लीग कैप्टन शमशेर सिंह मलिक व प्रसिद्ध महिला नेत्री एवं कवि शुभा ने संयुक्त रूप कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में कुश्ती खिलाड़ियों के आंदोलन की उच्चतम कमेटी के सदस्य और कुश्ती कोच रणबीर सिंह ढाका, पूर्व खेल निदेशक व योग कोच एमएस देशवाल व जूनियर कोच शिक्षा डागर के पिता हरपाल सिंह डागर मौजूद रहे।
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महिला पंचायत में उठाईं प्रमुख मांगें
- देश के राज्यों व राष्ट्रीयस्तर पर लिंग संवेदी महिला खेल-नीति बनवाना।
- खेल नेतृत्व के तमाम निर्णयकारी, प्रशिक्षण संबंधी व ऑफिशियल, मैनेजर स्तर पर महिलाओं के लिए कम से कम एक तिहाई आरक्षण।
- 2009 की खेल नीति में रखे गए पंचायत स्तर तक खेल सुविधाओं के विस्तार को बढ़ाना।
- राज्य में होने वाले महिला-खेल मुकाबलों का ज्यादा प्रचार प्रसार करवाना।
- खेल निकायों में यौन शोषण विरोधी कमेटियों का गठन सुनिश्चित करवाना।
- कार्यस्थल पर महिला यौन-हिंसा को रोकने के तमाम उपायों को उनकी भावना अनुरूप लागू करवाना।
- खेल निकायों के सभी स्तर पर सघन लिंग संवेदीकरण के कार्यक्रम चलाना।
- अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदाय की खिलाड़ियों को विशेष प्रोत्साहन देना।
- राज्य में बंद एकमात्र खेलकूद महाविद्यालय को दोबारा खुलवाना।
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