समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव के साथ बेटियां सामाजिक वर्जनाओं की बेड़ियां तोड़ने लगी हैं। इसी कड़ी में रविवार रात न्यू जनता कॉलोनी में रहने वाले सेजल ने घोड़े पर बैठकर बनवारा निकाला। परिवार भी अपनी बेटी की शादी बेटे की तरह करते हुए रस्में निभा रहा है। अमर उजाला ने सेजल से इस बारे में बातचीत की तो उसने अपनी सोच साझा की।
दिल्ली की एक निजी कंपनी में सेंटर मैनेजर सेजल सैनी ने कहा कि मैं अपने परिवार की बेटी नहीं, बेटा भी हूं। अब तक हर जिम्मेदारी बेटे की तरह निभाई है। इसलिए परिवार भी बेटे की तरह ही शादी की रस्में निभा रहा है। रविवार रात ताई गोमती ने बनवारा दिया। इस दौरान पूरे गाजे बाजे के साथ मुझे घोड़े पर बैठाया गया। बनवारा इलाके की मुख्य गलियों से होकर गुजरा। मुझे घोड़े पर बैठा देख पूरा परिवार खुशी से सराबोर है। परिवार से इतना प्यार व सहयोग पकर मुझे भी अच्छा लगा। इस पल कभी नहीं भूल पाऊंगी।
कांता देवी ने कहा कि मेरी चार बेटियां हैं। बेटा नहीं है। इसलिए इन्हें ही बेटे की तरह पाला है। हमारे तो बेटा-बेटी यही हैं। दो बेटियों की पहले शादी हो चुकी है। सेजल की शादी हम बेटे की तरह करना चाहते हैं। इसीलिए इसका घोड़े पर बनवारा निकाला है। छोटी बेटी पढ़ाई कर रही है। पिता जयभगवान सैनी राशन डिपो चलाते हैं।