माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। परिवार पहचान पत्र को लेकर आम आदमी की परेशानी कम नहीं हो रही है। दो माह से शहरवासी नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन निगम के कर्मचारी सरकारी गरीब बनाने के लिए तारीख पर तारीख दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड कटे हैं, वह नजदीक सीएचसी केंद्र पर कारण जानकर आएं या निगम में मोबाइल साथ लेकर आएं। ताकि कर्मचारी ओटीपी पूछकर स्थिति स्पष्ट कर सकें।
प्रदेश सरकार ने केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को परिवार पहचान पत्र से जोड़ दिया है। योजनाओं का लाभ एक लाख 80 हजार या इससे कम की सालाना आय वाले परिवारों को ही मिल रहा है, जिन परिवारों की आय एक लाख 80 हजार से ज्यादा थी, सरकार ने एक जनवरी से उन परिवारों के बीपीएल राशन कार्ड व आयुष्मान कार्ड काट दिए। इसके चलते लोग दोबारा कार्ड बनवाने व आगे के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए परिवार पहचान पत्र में आय एक लाख 80 हजार से कम कराना चाहते हैं। इसके लिए लगातार नगर निगम कार्यालय के चक्कर काटे जा रहे हैं। सोमवार को निगम कार्यालय पहुंचकर हकीकत जानी तो परेशान लोगों ने अपनी पीड़ा जाहिर की।
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एक बच्चे की जाति ही बदल दी
परिवार में पति व पत्नी के अलावा तीन बच्चे हैं। दो बच्चों की जाति तो माता-पिता की तरह सामान्य दिखाई गई है, जबकि एक बच्चे की जाति परिवार पहचान पत्र में बदल दी गई है। ऐसा कैसे हो सकता है। 12 साल से उनका राशन कार्ड नहीं बना। अब कार्ड बनवाने के लिए आय प्रमाण पत्र बनवाना चाहती है, लेकिन उसमें भी त्रुटि कर दी गई।
आरती, पाड़ा मोहल्ला
दो माह से राशन नहीं मिला
परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। पति के जाने के बावजूद पेंशन नहीं मिल रही है। फिर भी ढाई लाख आय दिखा दी गई। इस कारण उसका राशन कार्ड कट गया। दो माह से राशन नहीं मिल रहा है।
सुदेश, गांधी कैंप
कटवाड़ा से सात बार आ चुकी हूं, तारीख पर तारीख मिल रही
गांव से सात बार आ चुकी हूं, लेकिन हर बार उन्हें अगली तारीख देकर वापस भेज दिया जाता है। वह अकेली रहती हैं उनके बेटे की शादी होने के बाद बेटा वबहू अलग रहते हैं। जब उन्होंने अपनी फैमिली आईडी को अलग करने के लिए आवेदन किया, लेकिन यह कहकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है कि फैमिली आईडी में कोई बदलाव नहीं होगा।
-सुदेश, कटवाड़ा
खाली कार्ड पर गेहूं मिलता था, वह भी दो माह से बंद
नगर निगम में आठ-नौ बार आ चुकी हूं। पहले खाकी कार्ड था जिसमें उन्हें गेहूं मिलता था, लेकिन दो माह पहले कार्ड काट दिया गया। पति बीमार है व उसकी भी तबीयत खराब रहती है। फिर भी यहां चक्कर काट रही है क्योंकि फैमिली आईडी में इनकम ज्यादा लिखी हुई है। इस कारण राशन कार्ड से नाम कट गया है।
वनिता आर्य नगर
पोता-पोती के साथ रहती हूं, फिर भी आय दिखा दी ढाई लाख
वह अपने पोता व पोती के साथ रहती है। एक बुजुर्ग व दो बच्चों की आय ढाई लाख दिखा रखी है। वह ज्यादा जानती भी नहीं है, लेकिन फिर भी नगर निगम में चक्कर काट रही हूं। कोई न कोई रास्ता निकल आए।
धनपति, शास्त्री कॉलोनी
आम लोग बार-बार निगम के चक्कर काटने की बजाए नजदीक के कम्युनिटी सर्विस सेंटर पर जाकर यह पता करें कि उनका कार्ड क्यों कटा। वहां भी पता न लगे तो निगम में आएं तो मोबाइल नंबर लेकर आएं, ताकि ओटीपी पूछकर कर्मचारी कारण बता सके। कागजात में जो कमी है, उनको दूर करें। पूरी प्रक्रिया में 10 दिन का समय जरूर लगता है। उनके पास हर रोज 100 से ज्यादा आवेदन आते हैं, जिनमें अस्सी प्रतिशत में आय कम कराने के लिए आवेदन है।
जगदीश चंद्र, सीपीओ नगर निगम