झज्जर। धान की फसल के अवशेषों के प्रबंधन के लिए सरकार एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही है, लेकिन अब भी 120 किसानों को प्रोत्साहन राशि मिलने का इंतजार है। कृषि एवं कल्याण विभाग ने इसके लिए मुख्यालय से बजट की मांग की है।
जिले के 1226 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन था, जिनमें से 120 किसानों के करीब 16.10 लाख रुपये अभी भी नहीं मिल पाए हैं।किसान अभी भी बजट आने के इंतजार में है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे धान की फसल के अवशेषों के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए पंजीकृत किसानों को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देती है। इसके तहत किसान धान की फसल के बचे अवशेषों को नहीं जलाते हैं, उनको यह राशि दी जाती है। पिछले साल धान की फसल की इइन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए 1226 किसानों ने 9398 एकड़ भूमि के लिए पंजीकरण करवाया था, जिसमें से लगभग 950 किसानों को 70 लाख के करीब प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में जा चुकी है। अभी भी लगभग 120 किसान ऐसे हैं, जो अभी तक पैसे आने का इंतजार कर रहे हैं। उनको लगभग 1610 एकड़ का पैसा अभी तक नहीं मिला है, ऐसे किसानों का करीब 16.10 लाख रुपये बकाया है। पिछले साल 20 जगहों पर धान के अवशेष जलने वाली जगहों को चिहिन्त किया था। इसके बाद दो किसानों पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
किसानों को जागरूक करने के लिए बनाई टीमें
इस साल 153125 एकड़ में धान की बिजाई की गई थी। सरकार ने धान की फसल के अवशेषों में किसान आग ना लगाए, इसके लिए जिला कृषि कल्याण ने लोगों को जागरूक करने के लिए गांव स्तरीय 264 टीमें, ब्लाक स्तर पर पांच टीमें, सब डिविजन स्तर पर दो टीमें और जिला स्तर पर एक टीम बनाई है ताकि लोगाें को धान की फसल के अवशेष ना जलाने के लिए जागरूक किया जा सके।
वर्जन
जिन किसानों ने इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए अवशेष प्रबंधन एक हजार प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि योजना के तहत 1226 किसानों ने 9398 एकड़ भूमि के लिए पंजीकरण करवाया था। इसके बाद पहचान कर 1092 किसानों को सही पाया गया था, उनमें से 950 के बैंक खातों में पैसे भेजे जा चुके हैं। जिनके पैसे अभी तक नहीं आए है, वो किसान वैरिफाई किए जा चुके हैं। जल्द ही उनके पैसे भी भेज दिए जाएंगे।
जितेंद्र अहलावत, कृषि उप निदेशक, झज्जर