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Haryana: रोहतक बम धमाकों का आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा बरी, 1997 में हुए थे दो बम धमाके

Fri, 17 Feb 2023 07:34 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

मामले में 26 साल में पुलिस एक भी मजबूत गवाह और सबूत नहीं पेश कर सकी। टुंडा अजमेर सेंट्रल जेल से वीडियो कॉनफ्रेंस के माध्यम से पेश हुआ। वर्ष 1997 में रोहतक शहर के किला रोड व पुरानी सब्जी मंडी में सिलसिलेवार दो बम धमाके हुए थे। कई लोग घायल हुए थे, लेकिन किसी ने भी आरोपी को नहीं देखा था। 
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Karim Tunda - फोटो : File Photo
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विस्तार
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हरियाणा के रोहतक में किला रोड और पुरानी सब्जी मंडी में 1997 में हुए दो सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य आरोपी और कुख्यात आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को अदालत ने बरी कर दिया है। पिछले 26 सालों में केस की सुनवाई के दौरान पुलिस टुंडा के खिलाफ कोई मजबूत गवाह या सबूत नहीं पेश कर सकी। बम धमाकों में कई लोग घायल हुए थे, लेकिन किसी ने भी आरोपी टुंडा को नहीं पहचाना। इसके बाद अतिरिक्त सेशन जज की अदालत ने टुंडा को बरी करने का आदेश दिया। इस केस में टुंडा से पहले उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद आमिर खान भी बरी हो चुका है।

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किला रोड व पुरानी सब्जी मंडी में 26 साल पहले वर्ष 1997 में दो बम धमाके हुए थे। इनमें कई लोग घायल हुए। दहशत में डूबे शहर में हर तरफ बम धमाकों की चर्चा रही। जांच एजेंसी ने भी इस मामले में काफी हाथ-पैर मारे। इसके बावजूद अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हुआ। शहर के किसी भी व्यक्ति ने धमाकों के आरोपी को नहीं देखा।

जांच एजेंसी की ओर से पुख्ता सबूत व गवाह अदालत में पेश नहीं किए जाने के चलते आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को शुक्रवार को 10 साल बाद अदालत ने बरी कर दिया। लंबी सुनवाई के बाद एएसजे राजकुमार यादव की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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शुक्रवार को अदालत में शहर के 26 साल पुराने बम धमाके के केस में सुनवाई हुई। आरोपी आतंकी टुंडा सेंट्रल जेल अजमेर से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत में पेश हुआ। सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाह व सबूतों के आभाव में आरोपी को बरी करने के आदेश दिए। पिछले 10 साल से टुंडा इस 26 वर्ष पुराने केस में आरोपी के तौर पर प्रस्तुत हो रहा था।

उत्तर प्रदेश में हापुड़ जिले के पिलखुआ निवासी 80 वर्षीय अब्दुल करीम टुंडा को पुलिस ने 26 अक्तूबर 2013 को सोनीपत से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह लगातार केस में आरोपी के रूप में पेश हुआ। शुक्रवार को अजमेर जेल से इस केस में अंतिम बार वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत में पेश हुआ। इस केस में बरी होने वाला यह दूसरा आरोपी है। इससे पूर्व उत्तर प्रदेश के हापुड़ का ही मोहम्मद आमिर खान बरी हो चुका है।

बम धमाकों के मामले में पुलिस ने दो केस दर्ज किए थे। इसमें एफआईआर नंबर 71 में कुल 18 व एफआईआर नंबर 54 में कुल 34 गवाह अदालत में पेश हुए। इनमें भीड़ में शामिल लोग व पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। इस केस की सुनवाई के दौरान करीब छह न्यायाधीशों के समक्ष 69 तारीखें लगीं।

आरोपी अब्दुल करीम टुंडा के अधिवक्ता विनीत वर्मा ने बताया कि बम धमाके के आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को अदालत ने बरी कर दिया है। जांच एजेंसी इस मामले में कोई पुख्ता सबूत या गवाह पेश नहीं कर पाई। पिछले 10 साल से वह जेल में रह कर ही अदालत में पेश हुआ।

शहर में 1997 में हुए थे बम धमाके
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1997 में शहर की पुरानी सब्जी मंडी में एक सब्जी विक्रेता की फड़ी पर धमाका हुआ। इसमें कई सब्जी विक्रेता व ग्राहक घायल हो गए। पुलिस इस धमाके की जांच कर ही रही थी कि किला रोड पर भी एक रेहड़ी पर धमाका हो गया। इसमें भी कई लोग घायल हुए थे। इस संबंध में सिटी थाने में केस दर्ज किया गया था। इसके तीन साल बाद दिल्ली पुलिस ने आमिर खान नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि बम धमाकों में यूपी के हापुड़ जिले के गांव पिलखुआ निवासी अब्दुल करीम टुंडा का हाथ है।

उस समय जांच एजेंसियों को टुंडा के साऊदी अरब या पाकिस्तान के कराची में होने की अपुष्ट खबरें मिलीं। आखिर 2013 में टुंडा नेपाल के रास्ते भारत आया तो दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में रोहतक पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई। सुनवाई के दौरान आरोपी टुंडा ने अपने ऊपर लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया था।

सोनीपत बम ब्लास्ट केस में दोषी करार
बहुचर्चित सोनीपत बम ब्लास्ट केस में आतंकी टुंडा को दोषी करार दिया जा चुका है। सोनीपत में 28 दिसंबर 1996 को दो बम ब्लास्ट हुए थे। इनमें मुख्य आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को दोषी करार दिए जाने के बाद जेल भेज दिया गया था।

धमाकों में उड़ा था हाथ, तब बना टुंडा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब 20 साल पहले बांग्लादेश में बम बनाने के दौरान हुए धमाके में अब्दुल करीम का बायां हाथ उड़ गया था। इसके बाद से ही उसका नाम टुंडा पड़ गया। टिफिन बम से राजधानी एक्सप्रेस में धमाका करने के मामले की सुनवाई अजमेर की टाडा अदालत में चल रही है, जिसमें टुंडा मुख्य आरोपी है। पिछले दिनों सीबीआई ने सुरक्षा कारणों के चलते उसे अदालत में पेश करने में असमर्थता भी जताई थी।

कौन है टुंडा
टुंडा का जन्म 1943 में पुरानी दिल्ली के छत्तालाल मियां में हुआ। पिता का लोहे की ढलाई काम था। टुंडा की हरकतों को देखकर पिता ने पुरानी दिल्ली छोड़ने का मन बनाया और गाजियाबाद जिले के पिलखुआ में बस गए। यहां टुंडा ने भाइयों के साथ बढ़ई का काम किया। उसकी शादी जरीना नामक महिला से हुई। टुंडा की गतिविधियां संदिग्ध थीं। वह कई-कई दिनों तक घर से गायब रहने लगा। वर्ष 1981 में वह जरीना को छोड़कर लापता हो गया। जब घर लौटा तो उसके साथ दूसरी पत्नी अहमदाबाद निवासी मुमताज भी थी। उसी दौरान टुंडा के पाकिस्तान में आईएसआई से ट्रेनिंग लेने की बात भी सामने आई। टुंडा के खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में 21 और गाजियाबाद में 13 मामलों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में कई मामले दर्ज हैं। इसके खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1956 में चोरी का दर्ज हुआ था। उस समय इसकी उम्र कम थी।

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