दंगा पीड़ितों को पूरा मुआवजा नहीं मिलने पर व्यापारियों ने आंदोलन की राह पकड़ी तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। दंगे में एक करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का नुकसान होने के बावजूद मुआवजा नहीं मिलने पर गुस्साए व्यापारियों को प्रशासन ने आश्वासन देकर मना लिया। प्रशासन ने एक करोड़ से अधिक के नुकसान का सर्वे शुरू करा दिया है। एडीसी की अध्यक्षता में बनी कमेटी सर्वे करेगी। सोमवार शाम को प्रदर्शन की चेतावनी देने वाले व्यापारियों के साथ डीसी ने मीटिंग कर एक सप्ताह में मुआवजा मिलने का आश्वासन दिया तो व्यापारियों ने भी आंदोलन टाल दिया।
दंगों में जिनकी एक करोड़ रुपये से कम की संपत्ति का नुकसान हुआ है, उनको सरकार की ओर से स्लैब के आधार पर मुआवजा मिल चुका है। लेकिन जिनका एक करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है, उनको मुआवजा नहीं मिल सका है। व्यापारियों ने चेतावनी दी थी कि सोमवार शाम को वे काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करेंगे। घबराए प्रशासन ने व्यापारियों को बैठक के लिए बुलाया। दंगा पीड़ित रवि गुगनानी, जगमोहन मित्तल, डीएस बधवार, अशोक धामड़ी, सुरेश शर्मा की डीसी अतुल कुमार के साथ मीटिंग हुई।
डीसी ने व्यापारियों को बताया कि सभी को स्लैब के आधार पर मुआवजा मिल रहा है। जिसमें पहले एक लाख, पांच लाख, दस लाख, बीस लाख, पचास लाख, एक करोड़ के स्लैब बांटकर मुआवजा दिया गया। अब एक करोड़ से ज्यादा नुकसान वालों को मुआवजा दिया जाना है, जिसके सर्वे के लिए एडीसी की अध्यक्षता में टीम बनाई गई है। टीम ने सोमवार से सर्वे का काम शुरू कर दिया है।
स्कॉलर रोजरी स्कूल के डायरेक्टर रवि गुगनानी ने बताया कि डीसी ने व्यापारियों को एक सप्ताह में मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। इस कारण ही आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। क्योंकि डीसी ने ज्यादा समय नहीं मांगा है और वे सभी उनकी बात से संतुष्ट हो गए हैं।
विधायक के साथ भी हुई व्यापारियों की मीटिंग
डीसी के बाद व्यापारियों ने विधायक मनीष ग्रोवर के साथ भी बैठक की। रवि गुगनानी के अनुसार विधायक ने कहा कि रोहतक के नुकसान का पूरा मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है और वे खुद इस पर नजर रख रहे हैं। विधायक ने व्यापारियों से कहा कि अगर उनको किसी तरह की परेशानी है और अन्य कोई मांग रखनी है तो वे किसी भी समय मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री ने किसी भी समय आने की बात कही है।
207 करोड़ 90 लाख का था दावा 34 करोड़ 68 लाख में निपटा
दंगा पीड़ितों की ओर से किए गए 207 करोड़ 90 लाख के नुकसान का दावा मात्र 34 करोड़ 68 लाख 91 हजार 995 रुपये में निपट गया है। इनमें उन सभी को शामिल किया गया है, जिनका एक करोड़ से कम का नुकसान हुआ है। डीसी अतुल कुमार ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी सरकार ने नुकसान की भरपाई के लिए प्रकोष्ठ बनाया हो और सभी पीड़ितों को मुआवजा दिया गया हो।
उनके अनुसार मुआवजा वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है और पीड़ितों से इसलिए हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं कि वे प्रशासन के मुआवजे से संतुष्ट हैं या नहीं। इसमें 97 प्रतिशत ने हस्ताक्षर करके मुआवजा लिया है। उनके अनुसार सभी को मुआवजा गठित कमेटियों के आंकलन करने के बाद ही दिया जा रहा है। डीसी के अनुसार कलानौर में नुकसान के 334 आवेदन आए थे, जिनमें से 310 को मुआवजा मिल चुका है।
महम में 109 आवेदन आए थे, जिन सभी का निपटारा कर दिया गया है। डीसी के अनुसार आगजनी व तोड़फोड़ से प्रभावित बिना बीमा के वाहनों के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को लिखा गया है। वहीं जिस संपत्ति का बीमा हुआ है, उसके लिए भी जल्द मुआवजा दिए जाने के लिए कंपनियों को कहा गया है। सरकारी संपत्ति के नुकसान के लिए भी पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। प्रेसवार्ता के दौरान जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मुनीश गुप्ता और नगर निगम के एटीपी के. के. वार्ष्णेय मौजूद रहे।
परीक्षाओं के लिए स्पेशल फोर्स की मांग
डीसी अतुल कुमार ने बताया कि परीक्षाओं के दौरान धारा-144 का सही ढंग से पालन हो सके, इसके लिए आगे होने वाली परीक्षाओं के दौरान स्पेशल फोर्स का गठन करने को उच्च अधिकारियों को लिखा गया है। परीक्षाओं के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो और परीक्षा केंद्रों के पास कोई नहीं जा सके, यह जिम्मेदारी उस फोर्स की होगी।
आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी पर होगी कार्रवाई
डीसी के अनुसार पिछले दिनों आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी द्वारा ज्यादा पैसे लेकर कार्ड बनाने की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। इसके लिए जिला सूचना विज्ञान अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि कंपनी को नोटिस जारी कर यह जानकारी ली जाए कि कितने आधार कार्ड बनाए गए और आधार कार्ड बनवाने वालों से कितना पैसा लिया गया। उन्होंने कहा कि कंपनी दोषी पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।