यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस का दावा करते हुए दोनों आरोपी सुपरवाइजरों को तो निलंबित कर दिया लेकिन असिस्टेंट रजिस्ट्रार श्याम सुंदर पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की। ऐसा तब है, जबकि एफआईआर में यूनिवर्सिटी ने ही सुपरवाइजरों के साथ असिस्टेंट रजिस्ट्रार का नाम दिया है। कैंपस में ही लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर श्याम सुंदर पर कार्रवाई कब होगी? इतना वक्त क्यों लग रहा है?
अंत:वस्त्रों की जांच का स्वतः संज्ञान लेने पर राज्य महिला आयोग को यूनिवर्सिटी के राजकीय अधिकारी प्रो. भगत सिंह राठी ने वीरवार को प्रारंभिक कार्रवाई रिपोर्ट भेजी है। इसे पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने गलत करार दिया है। एक परिजन ने बताया कि महिला आयोग को भेजी रिपोर्ट में अभद्रता के बजाय विद्यार्थियों पर शोर शराबा व नारेबाजी करने का आरोप लगाया गया है। इसमें छात्र संगठन प्रतिनिधियों पर मामला समाप्त नहीं होने देने की बात भी कही गई है। यह गलत है। सफाई कर्मचारियों पर समझौते का दबाव बनाने की बात भी गलत है।
महिलाओं की जांच के आदेश असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने दिए थे। इसके बाद जांच व फोटो की गई। इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, डॉ. आंबेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन के अध्यक्ष छात्र नेता विक्रम सिंह डुमोलिया ने कहा कि प्रो. राठी ने आयोग को भेजी रिपोर्ट में तथ्यों को छिपाया है। दलित समाज की बहन-बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार और आयोग को गुमराह करने वाले ऐसे उच्चाधिकारियों पर एससीएसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा होना चाहिए।
एमडीयू की महिला सफाई कर्मचारियों से अभद्रता के प्रकरण की जांच अब एसआईटी को दी गई है। एक पीड़ित महिला के बयान भी करा दिए हैं। शेष दो पीड़ित महिलाओं के भी बयान जल्द कराए जाएंगे। -सुरेंद्र सिंह भौरिया, पुलिस अधीक्षक।