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रोहतक के पैड प्रकरण की जांच SIT के हवाले: पीड़ित ने कोर्ट को बताई आपबीती, आरोपियों की हो सकती गिरफ्तारी

Sat, 01 Nov 2025 10:07 AM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक

सार

अंत:वस्त्रों की जांच का स्वतः संज्ञान लेने पर राज्य महिला आयोग को यूनिवर्सिटी के राजकीय अधिकारी प्रो. भगत सिंह राठी ने वीरवार को प्रारंभिक कार्रवाई रिपोर्ट भेजी है। इसे पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने गलत करार दिया है।
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रोहतक एमडीयू - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एमडीयू में महिला सफाईकर्मियों के अंत:वस्त्र उतरवाने के प्रकरण की जांच के लिए डीएसपी की अध्यक्षता में एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित की गई है। शुक्रवार को एक पीड़ित ने कोर्ट को भी आपबीती सुनाई। अब आरोपी असिस्टेंट रजिस्ट्रार व दोनों सफाई सुपरवाइजरों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। 26 अक्तूबर को हुई इस शर्मनाक को लेकर महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) ने अपने ही सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर, एचकेआरएन के तहत लगे सफाई सुपरवाइजर वितेंद्र और विनोद के खिलाफ पीजीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। वितेंद्र और विनोद को निलंबित किया जा चुका है।

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अभी असिस्टेंट रजिस्ट्रार का निलंबन नहीं हुआ। किसी की गिरफ्तारी भी नहीं की गई। इससे सफाईकर्मी गुस्से में हैं। वहीं, शुक्रवार को एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने डीएसपी रवि खुंडिया की अगुवाई में एसआईटी गठित कर दी। चार दिन से पीजीआई पुलिस जांच के नाम पर टालमटोल ही कर रही थी। शुक्रवार को पुलिस एक पीड़ित को कोर्ट लेकर पहुंची। उसने कैंपस में हुई शर्मनाक घटना को महिला जज के समक्ष सिलसिलेवार बयां किया। बताया कि सुपरवाइजर के कहने पर उनके कपड़े उतरवाकर अंत:वस्त्र जांचे गए। मासिक धर्म की पुष्टि के लिए सेनेटरी पैड की फोटो तक ली गई।

पुलिस ने दो अन्य पीड़ित महिलाओं के भी जल्द बयान की बात कही है। इससे स्पष्ट हुआ है कि सुपरवाइजरों ने ऐसा तीन महिला कर्मचारियों के साथ किया था। घटना वाले दिन राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष पत्नी के साथ कैंपस में ही ठहरे हुए थे। सुपरवाइजरों ने महिलाओं से तेजी से काम करने को कहा। महिलाओं ने पीरियड आने की बात कहकर थोड़ी रियायत मांगी तो दूसरी महिलाओं से उनके अंतःवस्त्र की जांच कराई गई। इसके बाद घंटों बवाल मचा। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने आंतरिक जांच कमेटी गठित की। यह कमेटी पीड़ित और आरोपियों के बयान दर्ज चुकी है। वहीं, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष इंजी. कृष्ण कुमार और रोहतक मेयर रामअवतार वाल्मीकि भी पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने का भरोसा दे चुके हैं।

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असिस्टेंट रजिस्ट्रार पर कार्रवाई कब?

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस का दावा करते हुए दोनों आरोपी सुपरवाइजरों को तो निलंबित कर दिया लेकिन असिस्टेंट रजिस्ट्रार श्याम सुंदर पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की। ऐसा तब है, जबकि एफआईआर में यूनिवर्सिटी ने ही सुपरवाइजरों के साथ असिस्टेंट रजिस्ट्रार का नाम दिया है। कैंपस में ही लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर श्याम सुंदर पर कार्रवाई कब होगी? इतना वक्त क्यों लग रहा है?

महिला आयोग को गलत रिपोर्ट भेजने का आरोप, एफआईआर की मांग

अंत:वस्त्रों की जांच का स्वतः संज्ञान लेने पर राज्य महिला आयोग को यूनिवर्सिटी के राजकीय अधिकारी प्रो. भगत सिंह राठी ने वीरवार को प्रारंभिक कार्रवाई रिपोर्ट भेजी है। इसे पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने गलत करार दिया है। एक परिजन ने बताया कि महिला आयोग को भेजी रिपोर्ट में अभद्रता के बजाय विद्यार्थियों पर शोर शराबा व नारेबाजी करने का आरोप लगाया गया है। इसमें छात्र संगठन प्रतिनिधियों पर मामला समाप्त नहीं होने देने की बात भी कही गई है। यह गलत है। सफाई कर्मचारियों पर समझौते का दबाव बनाने की बात भी गलत है।

महिलाओं की जांच के आदेश असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने दिए थे। इसके बाद जांच व फोटो की गई। इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, डॉ. आंबेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन के अध्यक्ष छात्र नेता विक्रम सिंह डुमोलिया ने कहा कि प्रो. राठी ने आयोग को भेजी रिपोर्ट में तथ्यों को छिपाया है। दलित समाज की बहन-बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार और आयोग को गुमराह करने वाले ऐसे उच्चाधिकारियों पर एससीएसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा होना चाहिए।
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अधिकारी के अनुसार

एमडीयू की महिला सफाई कर्मचारियों से अभद्रता के प्रकरण की जांच अब एसआईटी को दी गई है। एक पीड़ित महिला के बयान भी करा दिए हैं। शेष दो पीड़ित महिलाओं के भी बयान जल्द कराए जाएंगे। -सुरेंद्र सिंह भौरिया, पुलिस अधीक्षक।
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