रेल मंत्री सुरेश प्रभु की ओर से पीजीआईएमएस को 90 लाख रुपये की तीन नई आधुनिक एंबुलेंस मिल गई हैं। लेकिन अधिकारी खुश होने की बजाए संशय में फंस गए हैं कि अब इनका वे क्या करेंगे? क्योंकि संस्थान में उपलब्ध एक आधुनिक एंबुलेंस को एक साल में महज सात किलोमीटर ही चलाया गया है।
पीजीआईएमएस के ट्रांसपोर्ट विभाग में अब चार एडवांस लाइफ सेविंग (एएलएस) एंबुलेंस शामिल हो गई हैं। इसमें जीवन रक्षक दवाएं, वेंटिलेटर, मानीटर व उपचार के लिए अत्याधुनिक साजो सामान उपलब्ध हैं।
पर इन्हें संचालित करने की कोई अब जिम्मेदारी नहीं लेना चाह रहा है। क्योंकि इसे संचालित करने के लिए हर एंबुलेंस में एक मेडिकल आफिसर, एक इमरजेंसी मेडिसन तकनीशियन व अन्य स्टाफ का होना आवश्यक है। जबकि पीजीआईएमएस में इन एंबुलेंस को चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है।
एमएस कार्यालय में एंबुलेंस संचालन पर हुई बैठक
सोमवार को एएलएस संचालन के लिए चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में बैठक हुई। इसमें चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक चौहान, डीएमएस डॉ. सुखबीर, मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. नित्यानंद, पीसीसीएम के विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी, ट्रांसपोर्ट प्रभारी डॉ. आरबी जैन, आपात विभाग से सीएमओ डॉ. महेश माला आदि उपस्थित रहे।
बैठक में सभी डॉक्टरों ने इनकी जिम्मेदारी उठाने से मना कर दिया। सूत्रों की मानें तो पूर्व सीएम मास्टर हुकुम सिंह के मामले को ध्यान में रखते हुए सभी इस जिम्मेदारी से बचना चाह रहे हैं। अधिकांश डॉक्टरों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इन एंबुलेंस को महज चालक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है, इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ जरूरी है।
संचालन से अधिक रखरखाव पर हुए खर्च
पीजीआईएमएस में एक एएलएस पहले से है परंतु यह पूरे साल में महज सात किलोमीटर ही चली है। संस्थान को इसके संचालन से अधिक इसके रखरखाव में पूंजी खर्च करनी पड़ रही है।
जच्चा, बुजुर्गाें और गुलाबी कार्ड धारकों के लिए निशुल्क
संस्थान इन एंबुलेंस को सामान्य लोगों के प्रयोग के लिए स्थिति स्पष्ट नहीं करता। जबकि इन्हें निशुल्क प्रयोग करने की जिनको अनुमति है वे इसके लिए समय पर कागजात पूरे नहीं कर पाते। इसके चलते अकसर ये एंबुलेंस हमेशा खड़ी ही रहती हैं। गौरतलब है कि जच्चा को लाने, बुजुर्गों और गुलाबी कार्ड धारकों के लिए यह सुविधा निशुल्क है।
बोले अधिकारी
पीजीआईएमएस के पास अब चार एडवांस लाइफ सेविंग एंबुलेंस हो गई हैं। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा। हम इनका प्रयोग ट्रॉमा सेंटर के मरीजों के लिए करेंगे। नियमानुसार जो मरीज इस सुविधा का लाभ लेना चाहेंगे उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जाएगी।
- डॉ. आरबी जैन, यातायात प्रभारी एवं डीएमएस, पीजीआईएमएस।