रविवार को गांव बजीना (सोनीपत) निवासी बलबीर अपनी 13 माह की बीमार बेटी
कल्पना को खानपुर से रेफर करवाकर रोहतक पीजीआई लाए। दोपहर सवा दो बजे बच्ची
को दाखिल किया गया और हालत नाजुक देखते हुए निक्कू में शिफ्ट कर दिया गया।
कल्पना ने उपचार के दौरान कुछ घंटे बाद दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है
कि रविवार देररात तक डॉक्टरों ने कुछ नहीं बताया और सुबह छह बजे उसकी मौत
की सूचना दी गई।
विभाग से पता चला कि उनकी बेटी को वेंटिलेटर खाली न होने
के चलते सही उपचार नहीं मिल पाया। परिजनों को इस बात का मलाल था कि यदि
डॉक्टर समय पर बता देते कि वेंटिलेटर की जरूरत है तो वे किसी निजी अस्पताल
में ले जाते। हालांकि, प्रबंधन ने पूरे मामले को इस तरह रफा-दफा किया कि
किसी को भनक तक नहीं लगी। पीड़ित आपात विभाग के बाहर कुछ ही समय रोष जता
पाए। सोमवार दिन में जब इस संबंध में डॉक्टरों से पूछा गया तो उन्होंने ऐसे
किसी केस की जानकारी होने से ही मना कर दिया।
उठ रहे सवाल
- मरीज को यहां 18 घंटे तक उपचार के लिए रखा गया, फिर भी ब्रॉट डैड क्यों दिखा दिया गया?
- दाखिल होने के बाद मिलती हैं कई सुविधाएं, इनसे वंचित क्यों रखा जा रहा मरीजों को?
- विभाग नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहा?
- एमसीआई का रिकॉर्ड व वार्ड का डाटा सही करने के लिए क्यों टूट रहे नियम?
- हेल्थ विवि के निर्देश व एमएस के आदेश को कैसे कर रहे अनसुना?
(नोट: बच्ची को 18 घंटे इलाज के बाद ब्रॉट डैड दिखाए जाने के सारे दस्तावेज अमर उजाला के पास मौजूद)