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निगम का घोटाला, कागजों में ही मंदिर बना डाला

Tue, 11 Oct 2016 01:09 AM IST
अंकित चौहान / अमर उजाला ब्यूरो
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जमीन से गायब हो गया है मंदिर, आरटीआई में खुलासा - फोटो : amar ujala
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घोटालों के लिए बदनाम नगर निगम में मंदिर के नाम पर भी घोटाला कर दिया गया है। नगर निगम कार्यालय में मंदिर बनाने का ठेका छोड़ा गया और उसका काम भी शुरू कराया गया। यही नहीं, ठेकेदार को पहली किस्त के रूप में दो लाख रुपये से अधिक की राशि भी जारी कर दी गई। इसके बाद से पता नहीं चला कि मंदिर कहां गया? निगम कार्यालय में फिलहाल तो ऐसा कोई मंदिर नहीं है। मामले का खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। निगम की ओर से दी गई जानकारी में मंदिर निर्माण की बात कही गई है।
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पूर्व पार्षद नौरत्तामल भटनागर ने सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत नगर निगम से एक जनवरी से 31 दिसंबर-2015 तक कराए गए विकास कार्यों की जानकारी मांगी। नगर निगम अधिकारियों ने जानकारी देने के बजाए उन्हें खूब घुमाया। वह जानकारी प्राप्त करने के लिए चंडीगढ़ सूचना आयुक्त तक के पास गये। जब सूचना आयुक्त ने निगम अधिकारियों को सूचना देने के लिए कहा तब निगम की ओर से उन्हें जानकारी दी गई।

जब पूर्व पार्षद नौरत्तामल को वर्ष 2015 में कराए गए विकास कार्यों की सूची उपलब्ध कराई गई तो उसे देखकर वह चौंक गए। लिस्ट में क्रम संख्या 34 पर नगर निगम कार्यालय में मंदिर निर्माण का कार्य लिखा गया है। जिसका टेंडर नंबर 159909ए1281 है। यह टेंडर 9.98 लाख रुपये का छोड़ा गया है। निगम कार्यालय में मंदिर निर्माण शुरू कराने के बाद 2 लाख 40 हजार 728 रुपये का भुगतान पहली किस्त के रूप में किया गया है। लेकिन सच यह है कि नगर निगम दफ्तर परिसर में कोई मंदिर बनाया नहीं गया है। यदि मंदिर बनाया जाता तो वह वहां पर मौजूद रहता। जबकि इस समय वहां कोई मंदिर नहीं है। मेयर रेनू डाबला के अलावा ज्वाइंट कमिश्नर अरविंद मल्हाण तक को मंदिर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह खुद भी मंदिर निर्माण की बात सुनकर चौंक जाते हैं, क्योंकि ऐसा कोई मंदिर उन्होंने भी कभी नहीं देखा है।
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धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं करा सकता निगम

नगर निगम की ओर से वर्ष 2015 में कराए गए विकास कार्यों की सूची में मंदिर निर्माण देखकर पूर्व पार्षद नौरत्तामल ने खुद भी छानबीन की। जांच पड़ताल में पता चला कि कोई भी सरकारी कार्यालय किसी धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं करा सकता है। नगर निगम के नियमों के अनुसार कोई भी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि के लिए निगम की ओर से न बजट जारी किया जा सकता है न वह खुद निर्माण करा सकता है।

मंदिर निर्माण का मामला काफी गंभीर है। नगर निगम कार्यालय में मंदिर निर्माण कराने के नाम पर पैसे जारी कर दिए गए। पहले मैं सभी कागजात मंगवाकर देखूंगी उसके बाद ही संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया जाएगा, ताकि पूरे मामले की जांच हो सके और स्थिति साफ हो सके।
- रेनू डाबला, मेयर नगर निगम

मामला मेरे ज्वाइंट कमिश्नर बनने से काफी पहले का लग रहा है। इसलिए इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। आरटीआई से कोई संतुष्ट नहीं है या किसी काम में गड़बड़ी लग रही है तो वह मेरे पास शिकायत कर सकते हैं। उसके बाद मामले की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ मिलने पर कार्रवाई जरूर होगी।
- अरविंद मल्हाण, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम

नगर निगम के अधिकारियों ने विकास कार्यों के नाम पर खूब घोटाले किए हैं। इसलिए मुझे आरटीआई में केवल विकास कार्यों की लिस्ट दी गई है, जबकि मैंने सभी कार्यों की पेमेंट के वाउचर की कापी भी मांगी थी। काफी चीजें मांगी गईं, लेकिन नहीं दी गई हैं। वहीं, मंदिर के नाम पर घोटाले के मामले में दशहरे की छुट्टी के बाद शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
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- नौरत्तामल भटनागर, पूर्व पार्षद
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