अनिल मेरा लाड़ला बेटा था। मैंने उससे कहा था कि बेटा आज कॉलेज मत जा, लेकिन वो नहीं माना। उसने बस इतना कहा कि मां मैं जल्दी आ जाऊंगा, लेकिन अभी तक नहीं लौटा और अब कभी वापस नहीं आएगा। टिटौली गांव सोमवार शाम को खामोश था। सुनाई दे रही था तो एक घर में मां और बहन का रोना-चीखना। नेकीराम कॉलेज में मारा गया अनिल अपने परिवार में सबसे छोटा था। उससे बड़ी दो बहनें और एक भाई। मां बार-बार एक ही बात कह रही थी कि मैंने उसे आज कॉलेज जाने से मना किया था। अगर वो मेरी बात मान लेता तो मेरा लाल बच जाता। वहीं, अनिल के दोस्तों का कहना है कि अनिल कॉलेज का प्रधान बनना चाहता था। वह एक छात्र संगठन का चुनाव लड़ना चाहता था। हमेशा कहता कि मैं कॉलेज का प्रधान बनूंगा। अनिल की मौत के साथ ही किसान परिवार के सपने भी बिखर गए।