पहले रिपोर्ट लिखाने और बाद में बयान बदलने वाली नाबालिग पहलवान के दादा का कहना है कि पूरे आंदोलन का असली मकसद बृजभूषण सिंह को हटाकर कुश्ती संघ की चौधर यूपी से हरियाणा में लाना है। उत्तर प्रदेश में हरियाणा के पहलवानों की नहीं चलती। वह शनिवार को अमर उजाला से मोबाइल पर बात कर रहे थे।
रांची कैंप में हुआ भेदभाव बेटे के गुस्से की असली वजह
उन्होंने कहा कि उनके दो बेटे हैं। एक बेटे के एक व दूसरे के दो बच्चे हैं। चौथा बच्चा हुआ ही नहीं, तो मरने की बात कहा से आ गई। उन्होंने कहा कि उनकी पोती का जन्म 2004 में हुआ था। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वह बालिग है या नाबालिग। नाबालिग बताई जा रही पहलवान के पिता यानी मेरे बेटे द्वारा दिए गए बयानों से समाज में परिवार की बदनामी हो रही थी।
रेफरी ने कहा कि खेलना है तो खेलो, नहीं तो चले जाओ
मैंने बेटे को समझाया, हमारी बेटी के साथ केवल भेदभाव हुआ था। फिर क्यों बृजभूषण पर बेवजह के आरोप लगा रहा हो। चाहे बेटा लंबे समय से मेरे से बात नहीं करता, लेकिन परिवार के सम्मान के लिए वह मान गया। उसने अपने बयान वापस ले लिए। दादा ने कहा कि उसकी पोती के साथ रांची कैंप में भेदभाव जरूर हुआ। वहां जब बेटे ने आवाज उठाई तो एक रेफरी ने कहा कि खेलना है तो खेलो, नहीं तो चले जाओ। मैंने उसी समय बेटे को कहा था कि फेडरेशन के अध्यक्ष से शिकायत करो। बेटे ने कहा अध्यक्ष उस समय मौजूद नहीं था। इसलिए वह वापस घर आ गया।