एमडीयू के हॉस्टल में छात्रा नवीन के आत्महत्या करने के बाद से छात्राएं सदमे में हैं। गंगा हॉस्टल के जिस थर्ड फ्लोर पर लंच के दौरान छात्राओं की चहलकदमी और अठखेलियां देखने को मिलती थीं, वहां पर अब सन्नाटा पसरा है। रूम नंबर 71 से लेकर 105 तक के 95 फीसदी कमरों के बाहर ताला लटका है। बाकी बचे कमरों में छात्राएं डर के मारे अकेले नहीं रुक पा रही हैं। मंगलवार रात को खाना तो दूर वह अच्छे से नींद भी नहीं ले पाईं। छात्राओं ने बताया कि नवीन ने अपनी रूममेट के चाऊमीन और दूध लाने के लिए नीचे भेजा और इसी बीच फंदा लगा लिया। इस डर की वजह से बीकॉम, एमकॉम और एमएससी फाइनल और सेकेंड ईयर की 90 फीसदी छात्राएं बुधवार सुबह ही हॉस्टल से घर चली गईं।
बुधवार सुबह जहां अन्य हॉस्टलोें में चहल-पहल थी, गंगा हॉस्टल में सन्नाटा था। ज्यादातर कमरों पर ताले लगे थे। जिन कमरों में छात्राएं थी, वे सहेलियों के साथ असाइनमेंट बना रही थी या परिजनों से बात कर रही थीं। थर्ड फ्लोर पर रह रही छात्राओं ने दबी जुबान में बताया कि उनकी सहेली ने ठीक नहीं किया है। उसकी रूममेट और बेस्ट फ्रेंड का तो रो-रोकर बुरा हाल है। मंगलवार सुबह ही छात्रा नवीन अपने घर से हास्टल आई थी। उसने लेक्चर भी अटैंड किए और दोपहर को लंच के दौरान हॉस्टल आई। उसने अपनी रूममेट से कहा कि उसे बहुत जोरों से भूख लगी है। उसके लिए मेस में जाकर दूध और चाऊमीन ले आए। रूममेट नीचे ये सामान लेने गई और पीछे से नवीन ने फंदा लगा लिया। एक सहपाठी असाइनमेंट लेने गई तो नवीन का कमरा अंदर से बंद मिला। कई बार दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद एक छात्रा ने रोशनदान के शीशे पर ईट मारी और देखा कि नवीन पंखे से लटकी हुई है। एक छात्रा को रोशनदान से अंदर भेजा गया और उसने दरवाजा खोला। छात्राओं ने ही नवीन को फंदे से उतारा। छात्राओं की चीखें सुनकर वार्डन भी ऊपर आ गईं।
करनी थी परीक्षा की तैयारी, डर के मारे गईं घर
इन दिनों छात्राओं पर असाइमेंट बनाने का दबाव है। अक्तूबर में एचएसएससी की परीक्षा की तैयारी करने की वजह से वह जाना नहीं चाहती थीं। लेकिन इस हादसे के बाद ज्यादातर छात्राएं अपने घर चली गईं हैं। कुछ को उनके परिजन लेने के लिए आए।
रूममेट को भी नहीं बताई परेशानी, बहुत भावुक थी
छात्राओं ने बताया कि उसकी रूममेट दो साल से साथ में रह रही थी। वे बहुत अच्छी दोस्त थी और दोनों का एक-दूसरे के बिना दिल नहीं लगता था। इसके बावजूद नवीन ने अपनी रूममेट को परेशानी नहीं बताई। नवीन की मौत के बाद उसकी रूममेट का बुरा हाल था। वह जब भी उसे याद करती चीखने-चिल्लाने लगती। रूममेट की मां और भाई बुधवार सुबह उसे ले गए।
भागीरथी हॉस्टल में कमरा नंबर 31 बना स्टोर रूम
पिछले साल भी सितंबर में एमडीयू के भागीरथी हॉस्टल के कमरा नंबर-31 में एक छात्रा ने फंदा लगाया था। इस कमरे को लंबे समय तक बंद रखा गया और उसकी रूममेट को किसी दूसरे रूम में शिफ्ट कर दिया गया। एक साल बाद भी जब किसी छात्रा ने यह कमरा नहीं लिया तो इसे स्टोर रूम बना दिया गया। हालांकि, इस कमरे पर ताला नहीं लगा है और खुला रहता है।