जाट आरक्षण आंदोलन के समय हुए दंगे के बाद से पांच बार सुरक्षा के लिए भेजा पत्र
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मेयर रेनू डाबला ने अपनी जान को खतरा बताया है। डीजीपी और एसपी को पत्र लिखकर मेयर ने अपने लिए सुरक्षा की मांग की है। मेयर का कहना है कि वह शहर की बाहरी कालोनियों में लोगों की समस्याएं सुनने के लिए जाती हैं। कई बार उन्हें देर हो जाती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी होना चाहिए। अधिकारियों को लिखे पत्र में मेयर ने जिक्र किया है कि कांग्रेस सरकार के समय उन्हें दो सुरक्षाकर्मी मिले थे, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद सुरक्षाकर्मियों को हटा लिया गया।
मेयर रेनू डाबला ने डीजीपी और एसपी को सुरक्षा के लिए पहला पत्र जाट आरक्षण आंदोलन के बाद भेजा था। पत्र में उन्होंने लिखा था कि शहर में माहौल खराब है इसलिए उन्हें सुरक्षा चाहिए। लेकिन अधिकारियों ने मेयर के पत्र पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद मेयर ने निगम आयुक्त एवं उपायुक्त को पत्र लिखा है। इसके बाद से मेयर पांच बार डीसी, एसपी, डीजीपी को पत्र लिख चुकी हैं। पत्र में मेयर ने लिखा कि वह शहर के लोगों की समस्याएं सुनने के लिए बाहरी कालोनियों में जाती हैं। कई बार समस्याएं सुनते हुए शाम को ज्यादा देर हो जाती है। ऐसे में उनकी जान को खतरा है। उनको कोई कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है। इस कारण उनको सुरक्षा दी जाए। मेयर ने अपने पत्रों में यह भी कहा है कि कांग्रेस सरकार में प्रदेश के सभी मेयरों के पास सुरक्षाकर्मी थे, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद तीन मेयर के पास सुरक्षा है और अन्य की सुरक्षा हटा ली गई।
मुझे लोगों की समस्याएं सुनने के लिए शहर की बाहरी कालोनियों में जाना पड़ता है। ऐसे में मेरी जान को खतरा है। कांग्रेस सरकार के समय मुझे दो सुरक्षाकर्मी मिले थे। भाजपा की सरकार बनते ही कांग्रेस समर्थित मेयरों के सुरक्षा कर्मी हटा लिए गए। जबकि दूसरे मेयर के पास सुरक्षाकर्मी अब भी हैं।
- रेनू डाबला, मेयर नगर निगम