हरियाणा की रोहतक जिला पुलिस ने अंतरराज्यीय चोर गिरोह के पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जो कोठियों व आलीशान मकानों में ही चोरी करते थे। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद व बुलंदशहर के रहने वाले हैं, लेकिन फिलहाल दिल्ली में रहकर चोरी की वारदात अंजाम देते हैं। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 8 लाख 80 हजार की नकदी, एक आईफोन, सोने की चेन, कार व चोरी करने के लिए प्रयोग लोहे के औजार, रॉड व लोहे की पाइप भी बरामद की गई है।
एएसपी मेधा भूषण ने बताया कि सेक्टर 2 निवासी राजपति ने अक्तूबर 2022 में शिकायत दी थी कि उसके बच्चे विदेश में रहते हैं। वह देवर की बेटी के साथ बाजार गई थी। वापस आई तो घर का ताला टूटा मिला। अंदर से चोर 13 सोने की अंगूठी, 2 चेन, चार जोड़ी कानों के बाले व करीब 1 लाख रुपये की नकदी ले गए।
एसपी ने मामले की जांच सीआईए द्वितीय को सौंपी। सीआईए की टीम ने अंतरराज्यीय गिरोह के बदमाश अशरफ उर्फ राशिद उर्फ काला निवासी खुजरा, जिला बुलंदशहर हाल सलीमपुर रोड जखीरा मजिस्द सिकंदराबाद, नरेंद्र उर्फ रोहित निवासी रुपाली इन्कलेव गली, दिल्ली हाल गाजियाबाद व सचिन निवासी मयूर विहार गाजीपुर, दिल्ली को बहादुरगढ़ से गिरफ्तार किया।
जबकि इमरान सैफी निवासी रसूलपुर, औरंगाबाद मेरठ हाल में बुराडी दिल्ली को यमुनानगर से प्रोडक्शन वारंट व जान मोहम्मद उर्फ जोनी निवासी सराय रसुलपुर जिला मुज्जफरनगर हाल नजदीक आईटीआई चौक यमुनानगर को काबू किया।
छतीसगढ़, फरीदबाद व पंचकूला में चोरी केस 12 केस दर्ज
जांच में पुलिस को पता चला है कि आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। आरोपी इमरान के खिलाफ 2012 से लेकर अब तक छतीसगढ़, फरीदाबाद व पंचकूला में चोरी के 12 मामले दर्ज हैं। आरोपी अशरफ उर्फ राशिद पर फरीदाबाद व पंचकूला में चोरी के दो केस, आरोपी नरेन्द्र उर्फ रोहित पर चोरी का एक मामला दर्ज है। जबकि आरोपी सचिन पर गुरुग्राम में केस दर्ज है।
पाश इलाके की कोठियों में करता है गिरोह चोरी
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह बड़े शहरों के पाश इलाकों में कार में सवार होकर पहुंचते। उन कोठियों का पता करते, जहां बाहर ताले लगे हुए होते। 15 से 20 मिनट में गिरोह ताला तोड़कर वारदात अंजाम देकर कार में सवार होकर फरार हो जाता। लोहे की राॅड से ताले को चंद मिनट में तोड़ देते हैं।
एक बड़ी वारदात अंजाम देने के बाद गिरोह लंबे समय तक सक्रिय नहीं होता। इतना ही नहीं, गिरोह मोबाइल फोन का भी प्रयोग नहीं करता है। जिस राज्य में गिरोह चोरी करने जाता, वहां कार पर फर्जी नंबर की प्लेट का प्रयोग किया जाता। साथ ही रास्ते में कार की नंबर प्लेट बदलते रहते।