कर्जदार ने पहले दो लाख लेकर किए वापस, फिर 21 लाख लेकर फरार
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एक व्यक्ति लाखों रुपये का कर्ज लेकर फरार हो गया। यही नहीं उसने कर्जदारों से बचने के लिए पत्नी से थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। अब पीड़ित अपना पैसा वापस लेने के लिए कभी पुलिस तो कभी व्यक्ति के परिजन के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ितों की मानें तो व्यक्ति चोरी छुपे घर आकर परिजनों से मिलता है। ऐसे में एक पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली है। कोर्ट में दोनों मामले में सोमवार को सुनवाई है। दोनों पक्षों को कोर्ट में बुलाया गया है।
सेक्टर-4 निवासी दया किशन अहलावत संचार विभाग से रिटायर्ड हैं। उनका पहले झज्जर में ट्रांसपोर्ट का काम था। फिर वह रोहतक में ट्रांसपोर्ट का काम करने लगे। दया किशन वाहनों को तैयार करवाकर उनकी बिक्री करते हैं। दया किशन का कहना है कि वह अपनी गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स हिसार रोड स्थित एक दुकान से लेते थे। जिस दुकान से वह सामान लेते थे वह दुकानदार किसी अन्य जगह पर काम करने लगा। दुकानदार ने दया किशन को स्पेयर पार्र्ट्स खरीदने के लिए करौंथा के एक व्यक्ति से मिला दिया। वह व्यक्ति परिवार के साथ विजय नगर में रहता था। कुछ समय बाद दोनों के बीच आपसी विश्वास बढ़ गया। दया किशन का कहना है कि उस व्यक्ति ने वर्ष 2011 में दो लाख रुपये उनसे उधार लिये। फिर कुछ दिन बाद पैसे लौटा दिये। ट्रांसपोर्ट संचालक का कहना है कि एक दिन करौंथा निवासी व्यक्ति ने हिसार रोड पर दो दुकान खरीदने की बात कहकर कुछ रुपये मांगे। इस पर ट्रांसपोर्ट संचालक ने उसे अपनी पेंशन का रुपया सहित अन्य जगहों से रुपये लेकर पहले साढ़े पांच लाख फिर सवा छह लाख रुपये दिये। बाद में जब ट्रांसपोर्ट संचालक ने रुपये मांगे तो व्यक्ति टालमटोल करने लगा। जबकि वह लगातार अपनी पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीद रहा था।
न एसपी ने सुनी और न आईजी ने
रुपये नहीं मिलने के बाद ट्रांसपोर्ट संचालक ने मामले की शिकायत तत्कालीन एसपी शशांक आनंद को दी। एसपी ने रुपये का लेनदेन होने के कारण फाइल को सीएलजी ग्रुप में भेज दिया। यहां भी कोई समाधान नहीं हुआ। ट्रांसपोर्ट संचालक का कहना है कि उन्होंने आईजी, एसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों से मिलकर शिकायत की लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
संपत्ति बेचने पर लगे रोक
ट्रांसपोर्ट संचालक ने कोर्ट में इस्तगासा दायर कर मांग की है कि संबंधित व्यक्ति, उसकी पत्नी और उसके भाई के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया जाए। उन्होंने गुहार लगाई कि जब तक उनके रुपये नहीं मिलते तब तक व्यक्ति की पत्नी पर संपत्ति बेचने पर रोक लगे। ट्रांसपोर्ट संचालक का कहना है कि उसकी पत्नी कर्जदारों के रुपये देने की बजाय संपत्ति बेच रही है।