चलती ट्रेन में 32 लाख रुपये की लूट के आरोपी तीन दिन बाद भी रेलवे पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। रेलवे पुलिस और सीआईए सहित चार टीम दिल्ली तक पूछताछ के बाद भी अहम सुराग नहीं जुटा पाई हैं। पुलिस आरोपियों के ठिकानोें के बारे में भी जानकारी नहीं जुटा सकी है। घटना के बाद से ही रेलवे पुलिस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालांकि रेलवे पुलिस ने आसपास के गांवों में भी छापेमारी की है। क्योंकि पुलिस का मानना है कि वारदात को अंजाम देने वाले आसपास के गांव या कस्बे के जानकार हो सकते हैं।
ये भी पेंच
दरअसल इस वारदात ने रेलवे पुलिस को भी अचरज में डाल दिया है। रेलवे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात हुई भी है या नहीं। क्योंकि वारदात के हालात संदेहास्पद लग रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यात्रियों से भरी ट्रेन में तीन युवक नोटों से भरे बैग को छीन कर भाग जाते हैं। इसमें थोड़ा विरोधाभास है। वहीं, यदि इतनी बड़ी रकम को दिल्ली तक ही पहुंचाना था तो उसके चैक या अन्य किसी माध्यम से क्यों नहीं भेजा गया। हालांकि इन सवालों के जवाब तो पुलिस जांच में ही सामने आएंगे।
रैकी के बाद हुई वारदात
अभी तक पीड़ित कर्मचारियों को कैश देने वाले शौरी मार्के ट के व्यापारी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि पहले आरोपियों ने कैश ले जाने वाले दोनों कर्मचारियों की रैकी की। ताकि उनके आने जाने के समय, ट्रेन की बोगी सहित अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सके।
ये है मामला
दिल्ली के चांदनी चौक में आशीष कुमार एंड अंकित कुमार कूरियर कंपनी है। इस कंपनी के कर्मचारी राजस्थान के सिरोही निवासी धीरज और मांडनी निवासी कुइंया राम सोमवार को दिल्ली से रोहतक आए थे। दोनों को शौरी मार्केट के एक व्यापारी से रुपये लेने के लिए भेजा गया था। शाम को दोनों कर्मचारी 60 लाख रुपयों से भरा बैग लेकर दिल्ली जाने के लिए खुर्जा पैसेंजर ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन में तीन बदमाशों ने पिस्तौल के बल पर दोनों कर्मियों से 32 लाख रुपये लूट लिए। लूट का विरोध करने पर यात्रियों को गोली मारने की धमकी देकर चुप कराया और खरावड़ स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही पैसे लेकर फरार हो गए। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज किया है।