एटीएम को किसने, कैसे और क्यों फूंका यह तो जांच के बाद सामने आएगा, लेकिन यह एक हकीकत है कि शहर के अधिकतर एटीएम की सुरक्षा भगवान भरोसे है। अधिकतर एटीएम के केबिन में न तो बैंकों की तरफ से सुरक्षा गार्ड तैनात किये गए हैं, न ही पुलिस की ओर से सुरक्षा के कोई उपाय किये गए हैं। रात के समय तो हालात और खराब हो जाते हैं। वैसे तो अधिकतर एटीएम रात में बंद ही रहते हैं, लेकिन जो चालू स्थिति में हैं वहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। एटीएम केबिन में यदि बैंक का सुरक्षा गार्ड होता भी है तो उसके पास कोई हथियार नहीं होता। यदि गार्ड के पास हथियार हुआ भी तो वह इतना उम्रदराज होता है कि उसे चलाने की स्थिति में नहीं होता है। ऐसे में कोई भी एटीएम को आसानी से निशाना बना सकता है। यही नहीं, यदि कोई रात में एटीएम से कैश निकाले तो उसकी भी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। एटीएम के आसपास ही नहीं दूर-दूर तक पुलिस नजर नहीं आती।
नोटबंदी के बाद से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न बैंकों के एटीएम की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही थी। अब जाट आंदोलन में पुलिस कर्मियों की व्यस्तता की वजह से रात में चौक-चौराहों पर पुलिस की गश्त भी कम हो गई है। इस कारण बैंकों के एटीएम और नागरिक सुरक्षा रामभरोसे है। शहर के अधिकतर एटीएम में न केवल दिन बल्कि रात में भी गार्ड की तैनाती नहीं है। गत दिनों लगातार वारदातों के बाद भी बैंक प्रबंधक और पुलिस ने एटीएम की सुरक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
अस्सी फीसदी एटीएम में सुरक्षा कर्मी नहीं
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को शहर में कई एटीएम की सुरक्षा का जायजा लिया तो 80 फीसदी एटीएम में सुरक्षाकर्मी नहीं मिले। 20 फीसदी एटीएम में सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी निहत्थे थे। केवल कुछ के पास हथियार थे। सवाल यह है कि यदि एटीएम केबिन पर हथियारबंद बदमाश आ जाएं तो निहत्थे गार्ड क्या सुरक्षा करेंगे? यही नहीं, शहर के सार्वजनिक जगहों पर चल रहे एटीएम में उम्र दराज गार्ड तैनात हैं। उनके पास हथियार तो हैं, लेकिन कांपते हाथों से वे इसे कैसे संभाल पाएंगे?
रात में ज्यादा असुरक्षित हैं एटीएम
भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के पास दोनों एटीएम में सुरक्षा की स्थिति कुछ बेहतर है, लेकिन दूर-दराज के एटीएम में निहत्थे गार्ड होने से सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। इन दिनों एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आंध्रा बैंक, एक्सिेस, आईसीआईसीआई, पीएनबी, केनरा बैंक, एचडीएफसी के अधिकतर एटीएम बिना गार्ड के संचालित किये जा रहे हैं। यही हाल शहर में मुख्य चौक-चौराहों के समीप के एटीएम का है। शहर के बाहरी इलाकों में स्थित एटीएम में रात के समय यदि कोई वारदात को अंजाम दे तो गार्ड की चीख-पुकार सुनने वाला कोई नहीं है।
नोटबंदी के बाद से दिखाई नहीं दे रहे गार्ड
आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा हुई थी। इसके बाद से कुछ बैंकों के एटीएम बंद हैं। साथ ही वहां गार्ड भी दिखाई नहीं देते हैं। इसके पीछे मुख्य वजह एटीएम में कैश नहीं होना है, लेकिन एटीएम, सीसीटीवी कैमरे और एसी की सुरक्षा को भी भूल गए हैं। पीएनबी के शिवाजी कालोनी चौक, सुभाष चौक, दिल्ली बाईपास, जिला विकास भवन, वीएम मार्ट और शीला बाईपास चौक के समीप जितने भी एटीएम हैं, उनमें से किसी में भी गार्ड और कैश नहीं हैं। यही हाल लघु सचिवालय में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, कैनाल रेस्ट हाउस के समीप बैंक ऑफ बड़ौदा, शीला बाईपास चौक और अंबेडकर चौक के समीप एचडीएफसी और आंध्रा बैंक का भी है। सोनीपत स्टैंड के समीप ओबीसी और सिविल रोड के समीप कैनरा बैंक के एटीएम का शटर खराब होने की वजह से बंद रहता है।
एसबीआई, कैनरा और पीएनबी के एटीएम में उम्रदराज गार्ड
एसबीआई की मुख्य शाखा के बाहर, पावर हाउस चौक के समीप केनरा बैंक, बाबरा मोहल्ला समीप पीएनबी और जाट कालेज के समीप सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम की सुरक्षा उम्रदराज गार्डों के हाथ में है। इनमें से एसबीआई और केनरा बैंक के गार्ड के पास हथियार है तो बाकी के पास लाठी है।
गार्डों की ड्यूटी तय हो, एसपी लेंगे बैंक प्रबंधकों की बैठक
मैंने एटीएम में दिन-रात गार्ड नहीं होने के बारे में एसपी से बात की है। वे इसी सप्ताह सभी बैंकों के प्रबंधकों की मीटिंग लेंगे। एटीएम में 24 घंटे सुरक्षाकर्मी की ड्यूटि सुनिश्चित कराने के लिए सख्ती की जाएगी। जिन बैंकों ने हथियारों के लिए आवेदन किया है, उन्हें जल्द अनुमति दी जाएगी। सभी एटीएम में सीसीटीवी कैमरे चालू हालात में रहे, इसके निर्देश दिए जाएंगे।
- अतुल कुमार, जिला उपायुक्त, रोहतक।
डीसी और एसपी की जिम्मेदारी
बैंक और एटीएम को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी डीसी और एसपी की है। साथ ही प्रत्येक बैंक प्रबंधक की भी जिम्मेदारी है कि एटीएम में 24 घंटे गार्ड रहे और सीसीटीवी कैमरे भी ठीक हो।
- एनके बंसल, अग्रणी बैंक प्रबंधक (पीएनबी)।
एसबीआई के 50 एटीएम में 24 घंटे रहते हैं केयरटेकर
एसबीआई के एटीएम इंचार्ज ने बताया कि जिले में शहरी और ग्रामीण इलाकाें में 50 एटीएम चल रहे हैं। इनमें 24 घंटे केयरटेकर तैनात रहते हैं। प्रत्येक केयरटेकर के पास लाइसेंसी पिस्तौल होती है। सभी एटीएम में केयरटेकर दिन और रात में मौजूद रहते हैं। चाहे वह खराब हों या कैश न हो।