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भाईदूज पर शहीद लेफ्टिनेंट नीतिश कक्कड़ की याद में आंखें ‘नमन’

Fri, 13 Nov 2015 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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शहीद लेफ्टिनेंट नीतिश कक्कड़ की डायरी में चंद पंक्तियां लिखी हैं। खूूबसूरत है जिंदगी बहुत, जीना इसे खुशी से... सिमटा है दस्तूर दुनिया का, इन कविताओं में... हो सके तो लफ्जों के इस हार में, कुछ मोती मैं पिरो जाऊंगा...। लेकिन अब ये पक्तियां अधूरी लग रही हैं।
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 लग रहा है शायद इस कविता की आत्मा हम सबसे बिछुड़ गई है। अब युवा लेफ्टिनेंट की याद हर त्योहार पर पर इकलौती बहन नमन की आंखों को नम कर रही है। इन लाइनों में दर्द छिपा है एक इकलौते भाई का। देश सेवा के जज्बे से लबरेज युवा अपनी बहन से वापस लौटने का वादा करके गया था, लेकिन वो वापस नहीं लौटा। हर भैया दूज पर भाई की लंबी उम्र की कामना करने वाली बहन नमन की आंखें नम हैं। अपने भाई की यादों के साये में आते ही उसकी आंखों से धारा बह चलती है। शुक्रवार को भैया दूज सूना सूना रहेगा इस बहन के लिए।

आज बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। दूसरी ओर शिवाजी कॉलोनी निवासी शहीद लेफ्टिनेंट नीतिश कक्कड़ की इकलौती बहन नमन की आंखें अपने इकलौते भाई की याद में कितनी बार नम होंगी। 26 साल की उम्र में उसके भाई नीतिश के जीवन में आई 26 मई 2015 की रात ने परिवार की तीन जिंदगियों को झकझोर दिया है।
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ट्रेनिंग पूरी करते ही भटिंडा कैंट में आए नीतिश की ऑन ड्यूटी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। भले ही नीतिश को गए 5 महीने 17 दिन बीत गए हैं, लेेकिन कक्कड़ परिवार हर आहट कक्कड़ परिवार को रुला देती है। राखी और भाई दूज पर तो नमन सभी की आंखों को नम कर देती है। भाई की शरारतें, स्पोर्टिव नेचर सब कुछ उसकी आंखों में उतर आता है। दिवाली पर व्हाट्स-एप पर भी नमन ने स्टेटस लिखा- ‘रिटर्न इज पॉसिबल’... वह बस इतना ही कई पाई, ‘आई मिस यू सो मच ब्रदर’।

घर लौटता तो बहन को फोन गिफ्ट करता नीतिश
नीतिश के पिता जितेंद्र आर्य दिल्ली में मुख्य लोक अभियोजक (चीफ पब्लिक प्रोसिक्यूटर) हैं। आर्य ने बताया कि जब उसकी ट्रेनिंग के पैसे आए तो सबसे पहले बहन नमन को फोन किया और उससे पूछा कि क्या गिफ्ट चाहिए? तब, नमन ने एप्पल फोन की डिमांड की थी। अगर आज उनका बेटा होता तो अपनी बहन को यह गिफ्ट जरूर करता। नीतिश की मां रेनू कक्कड़ गृहिणी हैं। बहन नमन बहादुरगढ़ के एक कॉलेज में एमसीए फाइनल ईयर में पढ़ रही हैं।

पास अपनों के जा नहीं सकता मै
अब चाहकर भी पास अपनों के जा नहीं सकता मैं...। अपने दुख में और उनके सुख में बैठ दो पल मुस्कुरा नहीं सकता मैं...। यह कविता नीतिश ने अपनी पर्सनल डायरी में लिखी थी। उसकी इस खूबी का भी परिवार वालों को उसके चले जाने के बाद ही पता चला। वैश्य कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर नीतिश को अच्छी प्राइवेट जॉब मिल भी गई थी, लेकिन वो देशसेवा करना चाहता था, इसलिए तैयारी कर आर्मी में लेफ्टिनेंट बना।

बेटे की याद में 5 लाख रुपये किए दान
पिता जितेंद्र आर्य ने बताया कि वे राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा के सदस्य हैं। सभा की ओर से गांव भाली आनंदपुर में 5 एकड़ भूमि में कन्या गुरुकुल का निर्माण कराया जा रहा है। 11 नवंबर को गांव में बालिका गुरुकुल संकल्प महायज्ञ हुआ। इसमें उन्होंने अपने बेटे की याद में 5 लाख रुपये दान किए। उन्होंने बताया कि अभी बेटे का पहला मेहनताना नहीं आया है। पैसा आते ही उसके पहले भाग से जरूरतमंदों की सहायता करेंगे। क्योंकि, उनके बेटे को भी जरूरतमंद की सहायता करना बहुत अच्छा लगता था।
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