एसटीएम की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी सुरेश अपने बेटों के साथ नागपुर में किराये पर रह रहा था। पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी। अब वह रोहतक आया हुआ था। योजना के तहत पुलिस ने दबिश देकर सुरेश व उसके दोनों बेटों को दबोच लिया।
योजना के तहत फरार हुए थे पिता-पुत्र
ग्रामीणों का आरोप था कि व्यापारी पिछले कई दिन से भागने की तैयारी करता रहा, लेकिन ग्रामीणों को शक भी नहीं हुआ। उसने अपने गोदाम में जितनी भी फसल एकत्रित की थी वह सारी बेच चुका था। जिससे गोदाम खाली हो गए थे। जो पहले कभी भी खाली नहीं हुआ करते थे। इसके अलावा उसकी गांव में कपड़े की दुकान थी वह पिछले काफी दिनों से कपड़ा सस्ते दामों में बेच रहा था। दुकान खाली हो चली थी। इसके अलावा उसने अपनी प्रॉपर्टी पर या तो बड़ी मात्रा में बैंक लोन लिया हुआ है या फिर बेच चुका है।
दूध बेचकर भी व्यापारी में जमा करा देते थे रुपये
ग्रामीणों ने बताया था कि गांव में अति गरीबी के चलते कुछ परिवार दूध को खुद न पीकर बेच देते थे । उससे जो पैसा आता उसे भविष्य के लिए व्यापारी के पास जमा करा देते थे। इसी प्रकार दिहाड़ी, मजदूरी करने वाले व अन्य लोग व्यापारी के पास अपनी बचत जमा करा देते थे।