अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। करीब आठ साल से घर छोड़कर टेंट में रह रहे मिर्चपुर के पीड़ितों को अब भी सरकार पर भरोसा नहीं है। पीड़ितों ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुनर्वास की उम्मीद जगी है। सरकार ने आखिरी चुनावी साल में जमीन तलाशी है। चुनाव तक रजिस्ट्री ही नहीं मिल पाएंगी। आवास का सपना तो सालों बाद पूरा होगा।
घरों को अपनी आंखों के सामने जलता देखकर गांव से पलायन कर टेंट में बसे मिर्चपुर के पीड़ितों का जीवन अब भी नहीं बदला है। पिछले आठ साल से इन परिवारों का पुनर्वास नहीं किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से पुनर्वास के आदेश होने के बाद पीड़ितों को घर मिलने की संभावना जगी है। हिसार के तंवर फार्म हाउस में रहने वाले परिवारों के सिर पर छत तक नहीं है। टेंट फटने पर पैबंद लगाकर रह रह रहे हैं। परिवारों ने कहा कि हमने आठ साल बड़ी मुश्किलों से काटे हैं। अब न्याय मिला है। अदालत से ही न्याय की उम्मीद थी। न्याय मिलने में लंबा समय लगा है।
सात जुलाई 2018 को पुनर्वास योजना का रखा था पत्थर
प्रदेश सरकार ने मिर्चपुर के 258 पीड़ित परिवारों का ढंढूर गांव में पुनर्वास करने के लिए योजना बनाई है। करीब 12 एकड़ में इन्हें बसाया जाएगा। सीएम मनोहर लाल ने सात जुलाई 2018 को इस जमीन पर पुनर्वास योजना का पत्थर रखा। अब तक परिवारों को जमीन की रजिस्ट्री नहीं मिली है। पुनर्वास के तहत बसाए गए इस गांव का नाम दीनदयालपुरम रखा जाएगा।
पीड़ित बोले-मंत्री ने मांगे थे शपथ-पत्र
पीड़ितों ने कहा कि राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने हमसे पुनर्वास के शपथ-पत्र मांगे थे। हमने कहा कि पहले हमें जमीन की रजिस्ट्री दिला दो। आठ साल से केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
26 गवाहों को मिले हैं गनमैन
मिर्चपुर कांड के कुल 26 गवाह थे। सरकार ने अदालत के आदेश पर सभी 26 गवाहों को गनमैन दिए थे। यह गवाह मिर्चपुर से पलायन कर तंवर फार्म हाउस में रह रहे हैं। इस कारण पुलिस ने तंवर फार्म हाउस के बाहर अस्थायी चौकी बनाई है। एएसआई भरत सिंह ने बताया कि छह गनमैन कोर्स पर गए हैं। फोर्स की ड्यूटी में बदलाव किया गया है। कुछ अतिरिक्त फोर्स मांगी है।
हाईकोर्ट ने सही फैसला सुनाया : ओमप्रकाश
करीब 59 वर्षीय ओमप्रकाश ने कहा कि जो जैसा करता है, उसको वैसा ही फल मिलता है। हाईकोर्ट ने सही फैसला सुनाया है। हमें आठ साल से न्याय का भरोसा था। हमें सरकार और राजनीतिक सिस्टम पर भरोसा नहीं है। केवल न्यायालय पर ही भरोसा है।
अदालत का फैसला उचित : दिलबाग सिंह
दिलबाग सिंह ने कहा कि अदालत का फैसला उचित है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। किसी को हिंसा करने का अधिकार नहीं है। कुछ परिवारों को नौकरी के नाम पर केवल सफाई कर्मचारी नियुक्त किया गया है।
गांव में तनाव जैसी कोई बात नहीं : सत्यवान
मिर्चपुर के पीड़ित सत्यवान ने कहा कि गांव में रहने वाले कई परिवारों से बातचीत की है। गांव में तनाव जैसी कोई बात नहीं है। गांव में शांति का माहौल है। अगर कोई गांव में रहना चाहे तो आराम से रह सकता है।
पुलिस ने 98 लोगों के खिलाफ किया था मामला दर्ज
हिसार। मिर्चपुर कांड में नारनौंद पुलिस ने 98 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। 57 लोगों पर मामला कोर्ट में चल रहा था। दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने तीन लोगों को उम्रकैद और पांच लोगों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई थी। सजा पाने वाले चार लोगों मिर्चपुर निवासी रिषि पुत्र सतबीर, बलजीत पुत्र इंद्र, बोबल पुत्र टेका और बलवान पुत्र धर्म सिंह की मौत हो चुकी है।
अब गांव में पूर्ण रूप से भाईचारा कायम : बीरभान
दलित समुदाय के बीरभान ने कहा कि अब गांव में पूरी तरह से भाईचारा कायम है। 36 बिरादरी के लोग भाईचारे के साथ रह रहे हैं। फैसले से निराशा हुई है। सजा कोर्ट पहले दे चुका था, उससे हम संतुष्ट थे। हम गांव में भाईचारा कायम रखने के पक्ष में हैं। ढंढूर में जो प्लॉट हमें मिले हैं, अगर हम वहां रहेंगे तो भी हम गांव के साथ भाईचारा कायम रखेंगे।
ईब तो रजाबंदी में फैदा सै : फूलकली
कुछ नई धरा बैर-विरोध में, ईब हम ठीक रहवा सै गाम में। ईब रजाबंदी में फैदा सै। गाम के लोग ईब उन बातां नै भूल गए थे। गलत टेम पै फैसला आया है।
फैसले से गांव में मायूसी...
ग्रामीण छाजू राम, रामफल, अनिल, कृष्ण, सतबीर आदि ने बताया कि फैसला उम्मीद के विपरीत आया है। ग्रामीणों का कहना है कि फैसला ऐसा होना चाहिए था, जिससे ग्रामीणों का भाईचारा और मजबूत होता। अब गांव में 36 बिरादरी के लोग मिलकर एक साथ काम कर रहे हैं।