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फ्लैग : शहर की सबसे बड़ी नट बोल्ट कंपनी एलपीएस बोसार्ड की बढ़ी मुश्किल, एक दिन में दो झटके
हेडिंग : बैंक ने दिया 136 करोड़ का नोटिस, वेतन ने मिलने पर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
कंपनी के एजीएम बोले, छह गारंटर को दिया गया नोटिस, पांच साल की अवधि में लिया गया लोन
एलपीएस के पदाधिकारी राजेश जैन बोले, किसी बड़े निवेशक का इंतजार, समस्या जटिल, हालात सुधारने का कर रहे हैं प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शहर की सबसे बड़ी नट बोल्ट कंपनी एलपीएस बोसार्ड को शुक्रवार के दिन दो झटके एक साथ लगे। एक तरफ कैनरा बैंक ने 136 करोड़ रुपये का लोन वापिस न जमा कराने पर डिमांड नोटिस चस्पा कर दिया, दूसरी तरफ चार माह से वेतन न मिलने से परेशान कंपनी के कर्मचारियों ने गेट मीटिंग की और सोमवार को पूरे ग्रुप के कर्मचारियों के साथ मिलकर प्रदर्शन करने का फैसला लिया।
कैनरा बैंक की मुख्य ब्रांच के एजीएम अरविंद कुमार ने बताया कि एलपीएस बोसार्ड की तरफ से 2013 में 5 करोड़, सितंबर 2015 में 140 करोड़ व 2017 में 1 करोड़ 80 लाख रुपये बैंक की तरफ से लिए गए। अब 8 मई 2018 को बैंक को 136 करोड़ 5 लाख 12 हजार 410 रुपये लेने हैं। दो माह के अंदर अगर कंपनी राशि का भुगतान नहीं करती तो बैंक गारंटी के तौर पर रखी गई प्रॉपर्टी को जब्त कर सकता है। बैंक ने नोटिस एक कॉपी हिसार रोड स्थित कंपनी के गेट पर चस्पा की है, जबकि एक-एक कापी कंपनी के अधिकारी ललित कुमार जैन, राजेश कुमार जैन, दिनेश कुमार जैन, विजय कुमार जैन, निखलेश जैन, सुशीला जैन व सौरभ जैन को भेजी है। गौरतलब है कि
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चार माह से नहीं मिला वेतन, सोमवार को प्रदर्शन का ऐलान
उधर, चार माह से वेतन न मिलने से एलपीएस के कर्मचारियों का शुक्रवार को धैर्य जवाब दे गया। कर्मचारियों ने हिसार रोड स्थित प्लांट के बाद गेट पर एकत्रित होकर मीटिंग की। मीटिंग में पहुंचे कर्मचारी नेता कृष्णलाल उर्फ चीनी, नफे सिंह शर्मा सचिव, निंबर सिंह चौहान, राजबीर सिंह, विजयपाल, नरेश कुमार, राजकुमार शर्मा, नरोतामल भटनागर, सुरेश कुमार व चंद्रकांत ने कर्मचारियों से बातचीत की। तय हुआ कि पूरे ग्रुप के कर्मचारियों को सोमवार को एकत्रित करके जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा, ताकि मालिकों तक उनकी आवाज पहुंच सके। क्योंकि चार माह से वेतन न मिलने के कारण घरों में रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो रहा है।
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कर्मचारियों ने यूं किया दर्द बयां
-चार माह से एलपीएस ग्रुप के पक्के व कच्चे कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा। डीसी से लेकर श्रम आयुक्त तक शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा।
-85 कर्मचारी ग्रुप से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उनका अकाउंट क्लीयर नहीं किया जा रहा है, इसके कारण न तो ग्रेच्युटी का भुगतान हुआ और न ही पेंशन मिल रही।
-तीन साल से कर्मचारियों की न तो सालाना बढ़ोतरी हो रही और न ही वर्दी व जूते दिए जा रहे हैं।
-एलपीएस ग्रुप में दो हजार श्रमिक काम कर रहे हैं। परिवार के लोग अपनी प्रॉपर्टी का बंटवारा कर रहे हैं, लेकिन श्रमिकों को वेतन नहीं दिया जा रहा है।
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एलपीएस की तरफ बैंक का 136 करोड़ रुपये बकाया है, जो जमा नहीं करवाया जा रहा है। इसके चलते बैंक ने शुक्रवार को नोटिस चस्पा कर कंपनी को दो माह का समय दिया है। नहीं तो बैंक संपत्ति जब्त करने के लिए बाध्य होगा।
-अरविंद कुमार, एजीएम, कैनरा बैंक, मैैन ब्रांच रोहतक
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कर्मचारियों का चार माह का वेतन अटका हुआ है। डीसी से लेकर श्रम आयुक्त तक को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन वेतन नहीं मिल रहा। शुक्रवार को कर्मचारियों का धैर्य टूट गया और मीटिंग करके सोमवार को शहर में जोरदार प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया।
-कृष्णलाल उर्फ चीनी, प्रधान आदर्श औद्योगिक कर्मचारी संघ।
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बैंक लोन का मामला प्लांट नंबर एक व दो से जुड़ा है। किसी बड़े निवेशक का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बैंक लोन व कर्मचारियों की परेशानी को दूर किया जा सके। समस्या जटिल है, जिसके समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
-राजेश जैन, एमडी एलपीएस बोसार्ड।
1972 से शुरू होता है एलपीएस का इतिहास
सबसे पहले नवभारत और यूनाइटेड इंजीनियर्स कंपनी थी। जिसके बाद 1972 में एलपीएस बनी। 1993 में एलपीएस बोसार्ड बनी। इसके तहत एलपीएस ने स्विटजरलैंड की कंपनी बोसार्ड के साथ समझौता किया। इसके बाद 1992 में प्लांट दो, फिर प्लांट चार के साथ ही अन्य कई कंपनियों को खोला गया। एलपीएस माल बनाती और एलपीएस बोसार्ड को बेच देती और इसके बाद एलपीएस बोसार्ड एक ट्रेडिंग कंपनी के तौर पर काम करते हुए माल को विदेशों में बेचती है। गौरतलब है कि सैटेलाइट में लगने वाले पुर्जों का निर्माण एलपीएस ही करता है। इस कंपनी में करीब दो हजार कर्मचारी हैं। इनमें से पक्के कर्मचारियों मेें आठ सौ प्लांट एक और पांच सौ प्लांट दो में कार्यरत हैं।