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37 शवों की शिनाख्त में जीआरपी फेल , सोशल मीडिया का सहारा

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रोहतक रेलवे स्टेशन व आसपास वर्ष 2017 में मिले थे 80 शव
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फोटो
आधे से अधिक आत्महत्या से संबंधित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जीआरपी के लाख प्रयास के बाद भी वर्ष 2017 में मिले 37 शवों की शिनाख्त नहीं हो पा रही है। हालांकि आधे से अधिक मामले आत्महत्या से संबंधी है। जीआरपी ने पहचान के लिये सोशल मीडिया का भी सहारा लिया है।
आए दिन रोहतक रेलवे स्टेशन व उसके आसपास रेलवे ट्रैक आए दिन शव मिलते रहते है। पुलिस शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिये भेज देती है। जीआरपी सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017 में कुल 80 शव रोहतक व आसपास क्षेत्र से बरामद किये गये थे। जिनमें से 43 शवों की शिनाख्त कर ली गई। जबकि अभी भी 37 शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। हालांकि जीआरपी पंपलेट व बैनरों के माध्यम से शिनाख्त का प्रयास कर रही है मगर सफलता हाथ नहीं लग पा रही है। जीआरपी थानाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने बताया कि 37 शवों की शिनाख्त नहीं हो पा रही है। पिछले वर्ष रेलवे ट्रैक पर मिले 80 में से 40 यात्रियों द्वारा आत्महत्या के थे। 10 की ट्रेन से गिरकर मौत हुई। जबकि 10 ट्रेन में चढ़ने के प्रयास में गिरकर काल के गाल में समाएं। जबकि 20 के कारणों का पता हीं नहीं लग सका।
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शिनाख्त की यह होती है प्रक्रिया
जीआरपी थानाध्यक्ष के अनुसार मिलने के तुरंत बाद ही शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया जाता है। 72 घंटे तक शव को शिनाख्त के लिये रखा जाता है। इसके बाद भी शिनाख्त न होने पर शव को सुपुर्द खाक या फिर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। बरामद कपड़ों को संबंधित थानों पर रखवा दिया जाता है। बाद में परिजन बरामद कपड़ों के आधार पर शिनाख्त भी कर लेते है।
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