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लोहार के कब्जे से नहीं मिले कारतूस, क्लोजर स्टेटमेंट साबित करने के लिए नहीं सबूत

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रोहतक। लोकसभा चुनाव में विश्वकर्मा स्कूल के बाहर से गिरफ्तार रमेश लोहार को शनिवार को दोहरी राहत मिली। एडीजे कोर्ट रितु वाईके बहल की अदालत ने जहां एफआईआर नंबर 287 में जमानत दे दी, जिसमें आर्म्स एक्ट 25, 54, 59 के तहत रमेश नामजद है। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने 15 कारतूस गाड़ी के डेश बोर्ड के अंदर से बरामद दिखाए हैं। उस समय रमेश गाड़ी में भी नहीं थे। ऐसे में यह कहीं साबित नहीं होता कि कारतूस रमेश के हैं। आरोपी की क्लोजर स्टेटमेंट पुलिस ने दबाव डालकर तैयार की है, जिसे साबित करने के लिए पुलिस के पास सबूत नहीं हैं। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने रमेश लोहार को जमानत दे दी।
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पुनर्विचार करे निजी अदालत, वहां भी मिली जमानत
बचाव पक्ष के वकील सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में शिवाजी कालोनी थाने की एफआईआर नंबर 287 व 293 में नामजद रमेश लोहार की जमानत के लिए शुक्रवार को याचिका दायर की थी। याचिका पर अदालत में बहस हुई। बहस के बाद आर्म्स वाली एफआईआर में एडीजे कोर्ट ने जमानत दे दी, जबकि बार प्रधान जोजो को जान से मारने की धमकी देने व बूथ के अंदर बिना अनुमति जाने के आरोपों से जुड़े मामले को निचली अदालत के पास पुनर्विचार के लिए भेजा गया। शनिवार को ही जेएमआईसी विवेक सिंह की अदालत ने सुनवाई करते हुए रमेश लोहार की जमानत मंजूर कर ली। ऐसे में दोनों मामलों में लोहार को जमानत मिल गई।
यह रहा मामला
12 मई को लोकसभा चुनाव में मतदान चल रहा था। आरोप है कि सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के साथ रमेश लोहार काठमंडी स्थित बूथ नंबर 145 में दाखिल हुआ। वहां पर कांग्रेस के पूर्व विधायक बीबी बतरा से मंत्री की झड़प हुई। बाद में पुलिस ने रमेश को मतदान केंद्र के बाहर से उसके साथी सुनील के साथ गिरफ्तार कर लिया। गाड़ी से पुलिस ने 15 कारतूस व दो डंडे बरामद दिखाए। यहां तक एडीजे ला एंड आर्डर नवदीप विर्क तक ने टिविट करके इसकी सूचना दी। शिवाजी कालोनी थाना पुलिस ने रमेश के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की, जिनकी बुधवार को निचली अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
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