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मंत्री के कहने पर एडमिशन रद्द कराने का आरोप, छात्र ने कोर्ट में डाली याचिका

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। एमडीयू के होटल एंड टूरिज्म विभाग में छात्र का एडमिशन रद्द कराने का मामला तूल पकड़ गया। छात्र ने न्याय की मांग को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की है। साथ ही इस प्रकरण में एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें एडमिशन के मामले को लेकर विभाग के एक प्राध्यापक और छात्र के बीच बातचीत हुई है। उस ऑडियो में प्राध्यापक कह रहे हैं कि यह मामला ऊपर तक चला गया और प्रदेश के एक मंत्री ने कुलपति को खुद फोन किया है।
दरअसल, खिड़वाली गांव के रहने वाला छात्र धर्मेंद्र हुड्डा पिछले साल जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के मामले में नामजद था। वह कुछ समय जेल में भी रहा है। इसी वर्ष जुलाई में धर्मेंद्र ने एमटीटीएम (मास्टर ऑफ टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट) कोर्स में एडमिशन लिया था। सभी प्रक्रिया को पूरी कर अपनी फीस भर दी। उसका एडमिशन ऑनलाइन स्वीकार भी किया गया। पिछले सप्ताह छात्र के पास फोन आया कि उसका एडमिशन रद्द किया जा रहा है। एडमिशन रद्द करने को लेकर कई दिन पहले घर पर पत्र भी भेज दिया गया। धर्मेंद्र का आरोप है कि उसका एडमिशन एक मंत्री के कहने पर रद्द किया जा रहा है। बाकायदा उसके पास एक ऑडियो है, जिसमें यूनिवर्सिटी के एक प्राध्यापक कह रहे हैं कि मंत्री के कहने पर एडमिशन रद्द किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण को लेकर धर्मेंद्र ने अब कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की मांग की है। साथ ही कहा कि वह कुलपति कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठेगा।
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कुछ ऐसा है यूनिवर्सिटी का तर्क
जाट आरक्षण आंदोलन हिंसा के समय धर्मेंद्र एमटीएम (मास्टर ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट) के फाइनल ईयर में था, लेकिन वह पेपर नहीं दे सका। ऐसे में उसने इस बार कोर्स बदलकर एमटीटीएम में एडमिशन लिया है। जबकि यूनिवर्सिटी का तर्क है कि एमटीटीएम कोर्स को पहले एमटीएम कहा जाता था, लेकिन हाल में यूजीसी के निर्देशानुसार, इसका नाम बदलकर एमटीटीएम रखा गया है। नियमानुसार, एक कोर्स में छात्र दूसरी बार एडमिशन नहीं ले सकता।

प्राध्यापक और छात्र के बीच फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो
छात्र : हां सर
प्राध्यापक : यह मामला काफी ऊपर तक चला गया है। मंत्री ने डायरेक्ट वीसी को फोन किया था।
छात्र : किसने
प्राध्यापक : मंत्री ने, वीसी ने भी मीटिंग बुलाकर पूछा है कि एडमिशन कैसे हो गया।
छात्र : मंत्री ने कैसे रुकवा दिया, अब तो मैं कोर्ट में जाऊंगा।
प्राध्यापक : नहीं-नहीं सुनो अभी नहीं, इसमें देखो क्या है। छोटी-छोटी बातों का इगो नहीं बनाते और यह सारा मामला अब मामला मेरे ऊपर आ गया है। जो एडमिशन कमेटी के लोग है उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने बोला है कि .... (प्राध्यापक का नाम) ने जानबूझकर एडमिशन दिया है।
छात्र : नहीं, इसमें आपकी क्या गलती है। एडमिशन के नियम सभी फालो किया है। मंत्री कैसे एडमिशन रद्द कराते हैं मैं हाईकोर्ट में जाऊंगा।
प्राध्यापक : नहीं-नहीं, सुन-सुन, इसमें एक पेचीदा मामला आ गया कि पेज नंबर 73 के 13 नंबर लॉज है। उसमें लिखा है कि जो व्यक्ति मास्टर में एडमिशन ले चुका है और उसकी योग्यता पेपर देने की है तो वह उसके बेस पर एडमिशन नहीं ले सकता।
छात्र : सर, मैंने तो अलग कोर्स में लिया है। सभी नियम पूरे किए हैं। सब्जेक्ट और क्लास अलग है।
प्राध्यापक : इसमें अब मैं अकेला फसूंगा।
छात्र : सर, मैं कल कोर्ट में जाऊंगा, तभी कुछ देखता हूं।
प्राध्यापक : सुनो, अब बड़ों के बीच में मैं ही पिसूंगा।
- यह ऑडियो छात्र की तरफ से उपलब्ध करायी गई है। इसमें बातचीत करने वाला डिपार्टमेंट का एक प्राध्यापक बताया गया है। इसमें हुई बातचीत कितनी सच है या झूठ यह तो जांच का विषय है। अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता।
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यह बोले कुलपति
नियमानुसार, ही छात्र का एडमिशन रद्द किया गया है। छात्र पहले इसी कोर्स में एडमिशन लेकर दो वर्ष की पढ़ाई कर चुका है। जब तक छात्र अपनी डिग्री पूरी नहीं करता वह नए सिरे से एडमिशन नहीं ले सकता। एडमिशन कमेटी ने इतनी बड़ी लापरवाही कैसे की इसकी जांच की जा रही है।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति एमडीयू
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