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किसानों के खून से रंगे हैं भाजपा के हाथ : सुरजेवाला
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मध्यप्रदेश के मंदसौर में छह किसानों की नृशंस और निर्मम हत्या के बाद भाजपा के संपूर्ण नेतृत्व के हाथ खून से रंगे हैं। पूरे देश के किसान आंदोलन की राह पर हैं लेकिन उनके घाव पर मरहम लगाने की बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योग की नई रचना में लगे हैं, जिसे मौन आसन कहते हैं।
रेवाड़ी में पत्रकारों से बातचीत में सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस मंदसौर में हुए मामले को मामले को कभी नहीं भुनाएगी। यह भुनाने का नहीं सुलझाने का विषय है। किसान की पीड़ा शरीर पर लगी चोट के समान हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को पहले सहारनपुर और फिर मंदसौर जाने से रोकना भाजपा की क्रूर मानसिकता को दर्शाता है।
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उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों पर 45 मुकदमे तो दर्ज कर लिए लेकिन किसानों की हत्या का मुकदमा आज तक दर्ज नहीं हुआ। किसानों की हत्या के 12 दिन बीतने के बाद भी प्रदेश में मार्शल लॉ की स्थिति बनी हुई है। प्रधानमंत्री को पड़ोसी देशों में हुई त्रासदी पर शोक जताने, एक दर्जन विदेशी यात्रा करने, विदेशों सेे आए मेहमानों की आवभगत एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की माता की कुशलक्षेप पूछने का समय है। लेकिन देश के अन्नतदाता के घावों पर मरहम लगाने का समय नहीं है। भाजपा का नया नारा मर जवान, मर किसान है।
झुठला गए कुरुक्षेत्र में खाई कसम
सुरेजवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में कुरुक्षेत्र की धरती पर भगवद्गीता की कसम उठाकर वादा किया था कि वह किसानों को लागत के पचास फीसदी मुनाफा देंगे। फिर इसे देश में दोहराया। भाजपा के घोषणापत्र में पृष्ठ 44 में आज भी अंकित है। फिर 22 फरवरी को उच्चतम न्यायालय में नरेंद्र मोदी शपथ पत्र देकर यह अंकित करते हैं कि देश के किसान को भाजपा सरकार कभी लागत पर पर 50 प्रतिशत मुनाफा नहीं देगी। रेवाड़ी की धरती पर शहीद जवानों की कसम उठाकर पूरे देश के जवानों से वादा किया कि वन रैंक वन पेंशन देंगे। सत्ता में आने के बाद मोदी ने वन रैंक वाइट पेंशन बना दी। 1400 दिन से सैनिक धरने में आंदोलनरत हैं। इन्हें सीने पर लाठी मारने के अलावा कुछ नहीं किया।
यूपीए सरकार ने किया 72 हजार करोड़ का ऋण माफ
यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों का 72 हजार करोड़ रुपये माफ किया। यह प्रांतीय सरकारों ने नहीं किया। उस समय की जरूरत के मुताबिक बुंदेलखंड को करीब 22 हजार करोड़, विदर्भ को 18 हजार करोड़ एवं आंध्रप्रदेश को 15 हजार करोड़ का पैकेज दिया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली कहते हैं कि कर्जे के बोझ से दबे और आत्महत्या की ड्यूटी पर खड़े किसान का कर्जा माफ करने की जिम्मेदारी केंद्र की नहीं प्रांतीय सरकारों की है। अगर मोदी सरकार सात उद्योगपतियों का एक लाख 45 हजार करोड़ रुपया माफ कर सकती है, जो उन्होंने संसद के पटल पर जवाब में दिया तो इस देश के किसान का दो लाख करोड़ रुपये का कर्जा क्यों माफ नहीं कर सकती। वहीं सरकार 12 मुख्य उद्योगपति हैं उनका दो लाख 56 हजार करोड़ रुपया और माफ करने जा रहे हैं। 19 उद्योगपतियों का चार लाख करोड़ आप माफ कर रहे हैं। तो 70 करोड़ किसान और भूमिहीनों का दो लाख करोड़ क्यों माफ नहीं हो सकता।
निजी बीमा कंपनियां ले रही मुनाफा
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा राहत योजना जिससे किसान को फसल नष्ट होने पर 20 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिलता था उसे बंद कर दिया गया। उसकी जगह प्रधानमंत्री बीमा योजना की शुरुआत की और कहा कि यह दुनिया की सबसे बेहतरीन योजना है। उस योजना के 2016 के आंकड़े बताते हैं कि वह 14 निजी बीमा कंपनियों को मुनाफा देने की योजना है। उनका कंपनियों का नुकसान दूर करने की योजना है। इसका कारण वर्ष 2016 में जो बीमा राशि किसान ने प्रांतीय सरकार और केंद्रीय सरकार को दी उसका प्रीमियम 17 हजार करोड़ रुपये है। वहीं जो किसान को मुआवजा दिया वह सात हजार करोड़ रुपये है। ऐसे में 10 हजार करोड़ से ज्यादा मुनाफा एक फसल के प्रीमियम से इन कंपनियों ने कमा लिया।
सरकार ने बंद की बिजली बनाना
प्रदेश सरकार को निशाने पर लेते हुए सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस के समय पर ट्यूबवेलों पर आठ घंटे गारंटी से बिजली सप्लाई होती थी। अब ना तो ट्यूबवेल, ना गांव की आबादी, ना खेत और ना ही उद्योगों को बिजली है। प्रदेश सरकार ने 1320 मेगावाट बिजली बनानी बंद कर दी है। यमुनानगर थर्मल पावर प्लांट का एक यूनिट बंद है। राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट थेकड़ जो 1200 मेगावाट का है कहते हैं उसे भी पिछले दिनों पूरा ही बंद कर दिया गया है। पानीपत के थर्मल पावर प्लांट के एक यूनिट को छोड़कर पांच यूनिट बंद पड़े हैं। इंदिरा गांाधी सुपर पावर प्लांट थाडली वन में 750 मेगावाट हमारा हिस्सा है। जिसे खट्टर साहब ने लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में एक तरफ किसान, व्यापारी, दुकानदार और उद्योगपति विचलित पीड़ित और उत्तेजित है।
वहीं तरफ खट्टर सरकार पैसा बचाने का काम कर रही है। करीब 1400 मेगावाट यूनिट बिजली होते हुए भी यह ना तो बन रही है और ना ही सप्लाई हो रही है। दक्षिण हरियाणा से केंद्र में मंत्री एवं प्रदेश में बड़े मंत्री हैं। फिर भी गुडग़ांव से महेंद्रगढ़ तक भेदभाव क्यों किया जा रहा है। इस इलाके के लोगों ने एक वादे के मुताबिक भाजपा को सत्ता दी थी। वह वादा था सत्ता में सबसे बड़ा अधिकार दक्षिण हरियाणा की सूखी धरती और बेरोजगार नौजवानों को मिलेगा। वादे के इतने टुकड़े हुए कि नौजवानों और किसान दोनों की छाती को छलनी कर गए।
यूपीए शासन में 17 प्रतिशत तक बढ़े फसलों के भाव
उन्होंने कहा कि यूपीए के शासन में लगभग सभी फसलों के भाव 17 प्रतिशत के हिसाब से बढ़े। लेकिन अब यह मात्र ढाई प्रतिशत रह गई है। हमारे समय में कपास 6000 रुपये क्विंटल बिकती थी। 6900 तक बिकी थी। आज इसके भाव क्या हैं। तीन साल में 1625 तक इसके भाव पहुंचे हैं। 1121 और 1509 किस्म धान को हमने बासमती घोषित कराया। फरीदाबाद से यमुनानगर तक चले जाएं तो पूरी जीटी रोड की यह बेल्ट हिंदुस्तान की धान का सबसे बड़ा कटोरा है। हमारे समय में यह 5200 से 55 रुपये क्विंटल तक बिकती थी। पिछली बार खट्टर साहब ने कहा कि धान 2400 तक बिकी है। बासमती 6000 तक बिकती थी अब यह 2800 रुपये क्विंटल है। सरसों, जौ और बाजरा इस पूरे इलाके की किसानों का सोना है। यह किस तरह से बिक रहा है। इन्हें सरकार की एजेंसियां खरीद करने भी नहीं आ रहीं। मध्यप्रदेश के किसानों को एक शिकायत यह भी थी कि वहां 5500 रुपये क्विंटल सोयाबीन कांग्रेस के समय बिकता था। आज वह 2000 रु2200 में बिक रहा है। सूरजमुखी जो हमारे इलाके में भी होती है उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या रह गया है। उसका असली बिक्री रेट क्या है। सभी जानते है। कहां जाए किसान। इसीलिए किसान ज्यादा अनाज पैदा करने के बाद भी आत्महत्या की ड्योड़ी पर खड़ा है।
मंच दो और ना ही पार्टी दो
सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस के ना मंच दो, ना पार्टी दो और ना ही मन दो हैं। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते अलग-अलग जाकर आंदोलन कर रहे हैं। कुमारी शैलजा संसदीय क्षेत्र अंबाला में धरना लगाएंगी। सभी कार्यकर्ता वहां जाएंगे। पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन को बल देने का काम कर रहे हैं। शब्दावली अलग हो सकती है। मंजिल और लक्ष्य एक है। उन्होंने कहा कि सरकार से संगठन है। संगठन से सरकार नहीं। मैं खुद संगठन का आदमी हूं। हमारी कहीं ना कहीं कमी रही कि अभी तक प्रदेश में संगठन गठन नहीं हुआ। लेकिन सुखद बात यह भी है कि अक्तूबर के अंत तक पार्टी के चुनाव हो जाएंगे। ब्लॉक से लेकर प्रदेश तक के संगठन का गठन हो जाएगा।
रिलायंस से ले ली जमीन
उन्होंने कहा कि रिलायंस रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड को प्रदेश में भूमि देने का निर्णय इंडियन नेशनल लोकदल और भाजपा की सरकार ने किया। कांग्रेस की सरकार 2005 में आई। उस समय भूमि का दक्षिण हरियाणा में अधिग्रहण हो चुका था। यह सही है रिलायंस के साथ फाइनल अनुबंध पर दस्तखत कांग्रेस की सरकार ने किया। जब रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड ने एससीजेड नहीं लगाया तो मैंने बतौर उद्योगमंत्री रिलायंस को चिट्ठी लिखकर हमारी जमीन वापस देने को कहा। आज रिलायंस के पास हरियाणा के किसान की एक इंच भी जमीन नहीं है।
पंजाब कोई पाकिस्तान नहीं है
सुरजेवाला ने कहा कि पंजाब कोई पाकिस्तान नहीं है। जो लोग पंजाब को छुआछूत की बीमारी मानते हैं। कांग्रेस ऐसा नहीं मानती। सतलुज-यमुना लिंक के पानी पर हरियाणा का अधिकार है। वह अधिकार कानूनी, संवैधानिक, नैतिक और सामाजिक है। पिता की संपत्ति का बंटवारा दो बेटों में होना चाहिए। यह बड़े को भी मिलेगा और छोटे को भी मिलेगा। संयुक्त पंजाब का बंटवारा तीन हिस्सों में हुआ। एक हिस्सा हम, एक हिमाचल प्रदेश एवं एक पंजाब थे। हमारे हिस्से का पानी पंजाब नहीं ले सकता और हम पंजाब के हिस्से का पानी नहीं चाहते। पिता की संपत्ति यानी संयुक्त संपत्ति में हमारा हिस्सा हमें मिलना चाहिए। इस पर किसी को एतराज नहीं हो सकता। हरियाणा का गठन 1966 में हुआ।
उस समय इंदिरा गांधी ने पंजाब पुनर्गठन कानून के तहत हरियाणा को 3.5 यानी 35 लाख एकड़ फीट पानी दिया। इतनी देर में कांग्रेस की सरकार चली गई। मुकदमे बाजी हुई। जब 80 के दशक में इंदिरा दुबारा आई तो उन्होंने त्रिपक्षीय समझौता कराया। इस पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों और देश के प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर हैं। यह समझौता पंजाब के उग्रवाद की आग में झुलसने की वजह से लागू नहीं हुआ। राजीव गांधी ने राजीव लोंगवाल समझौते को अकाली दल के साथ साइन किया। हमारे पानी के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक पैनल का गठन किया गया। उस समय मेरे पिता बिजली-पानी के मंत्री थे। नानी पालकीवाल ने केवल एक रुपये में यह केस लड़ा। इसके बाद अब फैसला आया जिसमें हम 35 लाख नहीं साढ़े 38 लाख एकड़ पानी का केस जीत गए। इसमें साफ लिखा है कि केंद्र सरकार पंजाब के अंदर से एसवाईएल का निर्माण करेगी। साढ़े 38 लाख फुट पानी हरियाणा को देगी। यह राजधर्म निभाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मोदी है।
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नानी की कुशलक्षेम पूछने गए हैं राहुल
उन्होंने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी की कुशलक्षेम पूछना और बुजुर्गों की सेहत का ख्याल रखना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। वह लोग जो अपने परिवार की सेवा करते हैं वह इस संस्कृति को अच्छी तरह से जानते हैं। वह लोग जो पूरे देश को अपना परिवार मानते हैं वह भी इस संस्कृति के परिचायक हैं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का 94 वर्षीय बुजुर्ग नानी से मिलना या उनकी सेहत का ख्याल रखना कदापि इस देश की संस्कृति के विरुद्ध नहीं हो सकता। राहुल गांधी बाकायदा देश को बताकर एक हफ्ते के लिए अपनी नानी की कुशलक्षेम पूछने गए हैं। वह दुनिया के किसी कोने में हो अपने ट्विटर, टेलीफोन के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लगातार मार्गदर्शन और सुझाव दे रहे हैं।
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