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गिरोह के सदस्यों को मिलते है 8 से 10 हजार

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रोहतक। अंतर्राज्यीय गोवंश तस्करी करने वाले गिरोह के पकड़े गए सदस्यों ने पुलिस की पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। गिरोह के तस्करों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर गोवंश को पहुंचाने के बदले 8 से 10 हजार रुपये कमीशन के रूप में दिए जाते हैं। यदि पुलिस गिरोह के तस्करों को पकड़ लेती है तो उसके परिजनों को दोगुने रुपये दिए जाते हैं।
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सीआईए-3 प्रभारी ललित यादव और उनकी टीम ने शुक्रवार को दिल्ली बाईपास से पंजाब के मुक्तसर के वकील और गुरुमेल उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में तस्करों ने खुलासा किया कि पिछले दो साल से पंजाब से हरियाणा, यूपी और अन्य स्थानों पर गोवंश की तस्करी कर रहे हैं। यूपी में कटान के लिए गोवंश को ले जाया जाता है। गोवंश से भरी एक गाड़ी को बताए गए ठिकाने तक पहुंचाने के बदले 8 से 10 हजार रुपये गिरोह का सरगना और अन्य सदस्य देते हैं। यही नहीं गिरोह के सदस्य मोबाइल पर लगातार संपर्क में रहते हैं। इसके अलावा कार में बैठे गिरोह के सदस्य गोवंश से भरे कैंटर के पीछे-पीछे चलते हैं। सीआईए-3 ने गिरोह के पंजाब के सरगना को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है।
उधर, अधिकतर मामलों में देखने में आ रहा है कि पुलिस गिरोह के सरगना तक नहीं पहुंच पा रही है। तस्करों को पकड़ने के बाद ही अतिश्री कर लेती है। यहीं कारण है कि सरगना पकड़े जाने के बाद गिरोह में नए सदस्यों को शामिल करता रहता है। पुलिस ने फरार गिरोह के सदस्यों की तलाश में हरियाणा के कई स्थानों पर दबिश दी, मगर सफलता हाथ नहीं लग सकी।
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