फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओवरलोडिड ट्रालों को पकड़ने के मामले में आरटीए के गिरफ्तारी वारंट जारी होने का मामला

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो सहित.........
विज्ञापन


फ्लैग : ओवरलोडेड वाहन पकड़ने के मामले में कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी करने का मामला
हेडिंग : आरटीए की जगह सचिव अदालत में पेश, कोर्ट ने थाना प्रभारी से मांगा जवाब तो बोले, मेरा एरिया नहीं
: सचिव ने जमा करवाई रिपोर्ट, कोर्ट को बताया छठा ट्रॉला भी छोड़ा
: दोनों पक्षों को गिरफ्तारी वारंट मामले में अदालत के लिखित फैसले का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। कोर्ट के आदेश के बावजूद 50 प्रतिशत जुर्माना राशि न लेकर ओवरलोडेड ट्राले न छोड़ने के मामले में शुक्रवार को एडीसी अजय कुमार आरटीए के तौर पर अदालत में पेश नहीं हुए। उनकी जगह आरटीए ऑफिस के सचिव ओमप्रकाश मोर ने अदालत में पेश होकर रिपोर्ट दी कि विभाग द्वारा कोर्ट के आदेश के तहत छठे ट्रॉले को अनलोेडेड करके छोड़ दिया है। वारंट मामले में अब दोनों पक्षों को कोर्ट के लिखित ऑर्डर का इंतजार है।
एडवोकेट योगेश शर्मा ने बताया था कि राजस्थान की ट्रांसपोर्ट कंपनी में वे लीगल एडवाइजर हैं। 15 जून को कंपनी के छह ट्रॉले राजस्थान से सीमेंट भरकर रोहतक आ रहे थे। आरटीए रोहतक ने ओवरलोडेड बताकर ट्रॉले जब्त कर लिए। एक ट्रॉला आरटीए कार्यालय में खड़ा किया गया, चार आईएमटी चौकी के अंदर खड़े किए। एक ट्रॉला कलानौर बस स्टैंड में खड़ा किया गया। योगेश कार्रवाई के विरोध में जेएमआईसी भरत सिंह की अदालत में चले गए, जहां अदालत ने आरटीए को 50 प्रतिशत जुर्माना राशि लेकर ट्रॉले छोड़ने के आदेश दिए। आरोप है कि आरटीए ने इसके बावजूद ट्रॉले नहीं छोड़े। कोर्ट ने आरटीए को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होने की हिदायत दी, लेकिन 26 जून को आरटीए पेश नहीं हुए। 27 जून को अदालत ने आरटीए के गिरफ्तारी ऑर्डर जारी कर दिए। साथ ही एसएचओ सिविल लाइन को हिदायत दी कि 29 जून तक आदेशों का पालन किया जाए।
विज्ञापन


थाना प्रभारी तलब, कोर्ट ने मांगा जवाब
दोपहर करीब सवा 12 बजे आरटीए विभाग के सचिव ओमप्रकाश मोर अदालत में पेश हुए। कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेशों के तहत पांच ट्रॉले पहले पुलिस ही छोड़ चुकी है, जबकि आरटीए कार्यालय में एक ट्रॉला है, उसके भी आरटीए ने रिलीज ऑर्डर जारी कर दिए हैं। इसके बाद कोर्ट ने सिविल लाइन थाना प्रभारी श्रीभगवान को अदालत में तलब किया। इंस्पेक्टर श्रीभगवान से पूछा कि कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया। श्रीभगवान ने अदालत को लिखित में बताया कि कोर्ट के ऑर्डर उनके पास पहुंचे, लेकिन कोर्ट परिसर आर्य नगर थाना और आरटीए ऑफिस शिवाजी कॉलोनी थाना एरिया में आता है। वहां आदेशों के पालन के लिए कोर्ट के आदेश भेज रखे हैं।

अदालत के लिखित आदेशों का इंतजार
आरटीए के गिरफ्तारी वारंट मामले में कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। आरटीए की जगह सचिव अदालत में पेश हुए। साथ ही इंस्पेक्टर के भी बयान दर्ज हुए। अब अदालत ने मामले में क्या फैसला लिया है। उसका इंतजार है। ऑर्डर की कॉपी मिलने के बाद आगे कदम उठाएंगे।
विज्ञापन

योगेश शर्मा, वकील ट्रांसपोर्ट कंपनी

अदालत के आदेशों का पालना हुआ, छठा ट्रॉला भी छोड़ा
कोर्ट ने सभी ट्रॉलों को 50 प्रतिशत जुर्माना राशि जमा कराने के बाद छोड़ने के आदेश दिए थे। पांच ट्रॉले पुलिस वीरवार को अपने स्तर पर छोड़ चुकी है। छठे ट्रॉले को शुक्रवार को आरटीए के ऑर्डर के बाद अनलोड करवाकर छोड़ दिया गया। लिखित में कोर्ट में रिपोर्ट जमा करवाई है। अदालत संतुष्ट है।
- ओमप्रकाश मोर, सचिव, आरटीए विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें