फ्लैग : सांपला तहसील में 48 लाख की गड़बड़ी का मामला, डीएसपी-रीडर ने दी गवाही, 6 घंटे चले सवाल-जवाब
हेडिंग : महिला क्लर्क ने गबन की राशि से खरीद ली कार, सोफे, स्कूटी व एसी : पुष्पा खत्री
: घरेलू सामान हर घर में होता है, अधिकारियों ने क्लर्क को सॉफ्ट टारगेट बनाया : वकील
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
नौ माह पहले सांपला तहसील में हुए 48 लाख रुपये के गबन मामले में वीरवार को गवाही पूरी हो गई। गवाही प्रक्रिया के तहत आखिरी गवाह डीएसपी पुष्पा खत्री व उनके रीडर के बयान दर्ज हुए। गवाही में डीएसपी ने कहा कि महिला क्लर्क ने सरकारी पैसे से कार, एसी, स्कूटी व दूसरा घरेलू सामान खरीदा है। साथ ही उनके रिश्तेदार व उनसे लाखों रुपये बरामद हुए हैं। जबकि महिला क्लर्क के वकील ने कहा कि यह घरेलू सामान हर मध्यम वर्गीय परिवार में मिल जाएगा। क्लर्क को महिला मानकर साफ्ट टारगेट बनाया गया है। अब 17 मार्च को आरोपी क्लर्क मंजू यादव के कोर्ट में बयान दर्ज होंगे।
सरकारी वकील नरेश कुमार ने बताया कि जुलाई 2017 में सांपला तहसीलदार सुभाषचंद्र ने सांपला थाने में केस दर्ज कराया था कि मंजू यादव तहसील में रजिस्ट्री क्लर्क के तौर पर कार्यरत हैं। तहसील की केश बुक उनके पास रहती थी। रजिस्ट्री की जो सरकारी फीस जमा होती थी, उसमें से लाखों रुपये की राशि क्लर्क ने बैंक में जमा न करवाकर अपने पास रख ली। साथ ही रसीद बुक पर बैंक की की मोहर खुद लगाकर रजिस्ट्रार के तौर पर उनके हस्ताक्षर करवा लिए। तहसील की करीब 48 लाख रुपये की राशि बैंक में जमा नहीं हुई। सांपला पुलिस ने रजिस्ट्री क्लर्क मंजू यादव के खिलाफ मामला दर्ज कर उसके पति अजय शर्मा को आईपीसी की धारा 120बी के तहत गिरफ्तार किया था।
दो घंटे में दर्ज हुए डीएसपी के बयान
सुबह महिला डीएसपी पुष्पा खत्री अदालत में पहुंची। पहले उनके दो घंटे बयान दर्ज किए गए। सरकारी वकील ने बताया कि गवाही में डीएसपी ने साफ तौर पर बताया कि बैंक की मोहर का प्रयोग करके कैसे लाखों रुपये की राशि क्लर्क ने अपने पास रख ली। साथ ही उससे घरेलू सामान खरीद लिया। लाखों रुपये की राशि उससे व उसके रिश्तेदार से बरामद हुई। सरकारी वकील ने अदालत ने अदालत में सामान की सूची भी दी, जिसकी खरीददारी की गई। पुलिस टाटा मैजिक में कार को छोड़कर ज्यादातर सामान भी लेकर पहुंची थी। दोपहर तक डीएसपी के बयान दर्ज किए।
कैशबुक पर तहसीलदार के हस्ताक्षर
लंच के बाद बचाव पक्ष के वकील एवं पूर्व बार सचिव डाक्टर दीपक भारद्वाज ने जांच अधिकारी से सवाल किए। कहा कि मामले की सही जांच नहीं की गई। क्या महिला क्लर्क अपने दम पर इतनी बड़ी सरकारी राशि अपने घर ले जा सकती है। एक तरफ तहसीलदार एवं शिकायतकर्ता अपने बयान में कहते हैं कि कैशबुक महिला क्लर्क किसी को नहीं देती थी, जबकि कैशबुक पर सब रजिस्ट्रार के तौर पर उनके ही हस्ताक्षर हैं। दूसरा सवाल, सांपला में स्टेट बैंक तहसील से चंद कदम दूरी पर है। फिर राशि रोहतक बैंक में क्यों जमा कराई जाती थी। एक तरह से महिला क्लर्क को सॉफ्ट टारगेट बनाया गया है।
डीएसपी सहित 18 लोगों ने अदालत के अंदर गवाही दी है। गवाही की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब 17 मार्च को आरोपी महिला क्लर्क के बयान दर्ज किए जाएंगे।
- नरेश कुमार, सरकारी वकील
महिला क्लर्क को सॉफ्ट टारगेट समझ कर फंसाया गया है। तत्कालीन तहसील के अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की गई है। बेहद तर्कपूर्ण ढंग से गवाहों से सवाल-जवाब हुए। इससे ज्यादा अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
- डॉक्टर दीपक भारद्वाज, वकील बचाव पक्ष