फ्लैग... पीजीआई का बहुचर्चित बच्चा चोरी प्रकरण : 10 सितंबर 2017 को वार्ड नंबर दो के लेबर रूम से चोरी हुआ था बच्चा
पीजीआई प्रबंध व जिला प्रशासन ने दिया था पिता को सरकारी नौकरी देना का आश्वासन,
परिवार पहुंचा एसीएस के द्वार : बच्चा नहीं मिला तो क्या दुनिया को गोली मार दे
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के बहुचर्चित बच्चा चोरी प्रकरण के चार माह बाद स्वास्थ्य विभाग ने पीड़ित पिता को सरकारी नौकरी देने के नाम पर ठेंगा दिखा दिया है। परिवार को अभी तक न तो सरकारी नौकरी दी गई है और न ही आर्थिक सहायता राशि दी गई है। यहीं नहीं जब पीड़ित अपनी समस्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग में एसीएस अधिकारी डीएमईआर धनपत के पास अपनी फरियाद ले कर गया तो उसे जवाब दिया गया कि बच्चे रोज मरते हैं, तो क्या सभी को सरकारी नौकरी दे दें। या उनका बच्चा नहीं मिल रहा है तो क्या वे सारी दुनिया को गोली मार दें।
यह दर्द बयान किया है लापता नवजात शिशु के चाचा पंकज धींगड़ा ने। पीड़ित ने बताया कि उसके भाई और गुम हुए बच्चे के पिता सन्नी गत बुधवार को संस्थान के कुलपति के कहने पर चंडीगढ़ अधिकारी से मिलने गए थे। वहां उन्होंने अधिकारी को बताया कि 10 सितंबर को वार्ड दो के लेबर रूम से बच्चा चोरी हो गया था। इसके बाद उन्होंने संस्थान में ही परिवार सहित हड़ताल की और प्रशासन द्वारा सरकारी नौकरी देने और चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता के आश्वासन के बाद उन्होंने पांच अक्टूबर को हड़ताल समाप्त कर दी। प्रशासन ने उनको आश्वासन दिया था कि वह इस प्रकार की उनकी सहायता करने के साथ ही बच्चे को तलाशने में हर संभव कोशिश करेंगे। लेकिन प्रशासन ने उसकी भाई रज्जो को कांट्रेक्ट पर नौकरी देकर अपना वायदा पूरा कर दिया। अब बच्चे को तलाशने में पुलिस कार्रवाई भी ढीली है। अब तक न तो डीएनए रिपोर्ट आई है और न ही पुलिस डॉक्टरों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कर पाई है। इसके उलट अधिकारी ने भाई को जलील करके वापस लौटा दिया है। अब वह मजबूरी में दुबारा विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। पंकज धींगड़ा ने बताया कि वह और उनका पूरा परिवार पहले ही तनाव में है। वह स्वयं इसी तनाव के चलते पीजीआइएमएस में उपचाराधीन हैं। इस समस्या को लेकर उन्होंने सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर से भी मुलाकात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह उनकी समस्या का समाधान कराएंगे। शिकायतकर्ता ने बताया कि अधिकारी ने उनके भाई को कहा है कि हड़ताल के दौरान उनकी मजबूरी थी कि वह अपनी हठ छोड़ दें।
नर्स के समर्थन में है पीजीआई का नर्सिंग एसोसिएशन
पीजीआईएमएस के नर्सिंग एसोसिएशन के प्रधान अशोक यादव ने कहा कि वह निलंबित स्टाफ नर्स के साथ खडे़ हैं। इस संबंध में उन्होंने कुलपति डॉ. ओपी कालरा से बात की है। इस मामले में अकेले स्टाफ नर्स ही दोषी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि स्टाफ नर्स का निलंबन समाप्त नहीं किया जाता तो वह हड़ताल करने पर मजबूर होंगे। अशोक यादव ने मांग करते हुए कहा कि जैसे संस्थान में इस मामले से जुडे़ अन्य लोग नौकरी कर रहे हैं, वैसे ही नर्स को भी नौकरी पर वापस रखना चाहिए। इसके साथ केस चलता रहेगा, यदि कोर्ट नर्स को दोषी करार देती है तो ही उसे नौकरी से निकाला जाना चाहिए।
मुझे बच्चा चोरी होने का दुख है और अफसोस है। लेकिन परिवार गलत बात कर रहा है। क्या किसी का बच्चा चोरी हो जाए या मर जाए तो उसको सरकारी नौकरी दे दी जानी चाहिए। यह भावनात्मक अत्याचार करने वाली बात है। गुम हुआ बच्चा पहले ही प्री मैच्योर था। जो असामाजिक तत्व उसे उठा कर ले गया है उसका पता नहीं चल पाया है। वह बच्चा बगैर मेडिकल केयर से नहीं रह सकता था। इसी पर पीड़ित को कहा था कि वह पहले जो कार्य करते थे, वहीं करें। मानवता के आधार पर पीड़ित परिवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर की ओर से दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। यदि प्रशासन इन्हें नौकरी दे भी देता है तो लोग पूछेंगे कि किस कानून के तहत उसको नौकरी दी गई है। इसके अलावा यदि वह कोई आरोप लगा रहे हैं तो किसी का मुंह तो पकड़ा नहीं जा सकता। जो हम इंसानियत के नाते कर सकते थे वह कर दिया है।
- धनपत्त सिंह, एसीएस, डीएमईआर, स्वास्थ्य विभाग