अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का काम अपराध की रोकथाम, पता लगाना एवं जांच करना होता है। लेकिन डेरा प्रमुख मामले के दौरान 10 दिन पुलिस का यह काम महज शब्दों तक सिमट कर रह गया। 18 से लेकर 28 अगस्त तक जिले में बदमाशों ने बेखौफ होकर खूनी खेल खेला, जिसमें डबल मर्डर सहित तीन हत्याओं एवं आधा दर्जन से अधिक सरेआम फायरिंग के मामले शामिल है। नाममात्र के पुलिस कर्मचारियों के भरोसे चल रहे जिले में बदमाशों ने पुलिस को भी खूब दौड़ाया। इतना ही नहीं बदमाशों ने खुले आम पुलिस के सामने तक फायरिंग की। लेकिन पुलिसबल कम होने के चलते पुलिस बेबस ही नजर आई। उल्लेखनीय है कि जिले में तैनात करीब 1250 अधिकारी एवं पुलिस कर्मचारियों में जिला महज एक डीएसपी, दो एसएचओ के साथ कुल 45 पुलिसकर्मियों के भरोसे रहा। हालांकि सोमवार की रात कुछ पुलिस कर्मचारी जिले में अन्य जिलों से वापस आ गए हैं।
ये हुई घटनाएं
जिले में डबल मर्डर से लेकर अनेक बड़ी घटनाएं हुईं। 20 अगस्त को शहर के बीचों-बीच जीता गुर्जर गैंग ने झोटा गैंग के ललित उर्फ मंरीडा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के बावजूद आज तक हत्यारों को तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाए। वहीं 25 अगस्त की देर शाम बाइक पर सवार होकर आए तीन बदमाशों द्वारा आलू गैंग के आजाद नगर निवासी पवन उर्फ पंजी एवं कुतुबपुर निवासी हितेश उर्फ लड्डू की हत्या कर दी गई थी। इस डबल मर्डर प्रकरण में झोटा गैंग का नाम सामने आया था। इस रात बदमाशों ने भाड़ावास गेट पुलिस चौकी, अंबेडकर चौक सहित शहर में करीब आधा दर्जन स्थानों पर लोगों में दहशत पैदा करने के लिए हवाई फायरिंग की थी। इसके बाद 26 अगस्त को महेश सैनी गैंग ने रामपुरा मोड पर मलखान उर्फ मुल्कु पर फायर कर जानलेवा हमला किया था, जिसमें मुल्कु बाल-बाल बच गया था। गोली पास की एक लैब के शीशे को पार करती हुए दुकान के अंदर जा लगी थी। वहीं 28 अगस्त को सुबह नौ बजे विश्वविद्यालय रोड पर पर एक बदमाश नारनौल निवासी एक विद्यार्थी की गन प्वाइंट पर बाइक छीनकर फरार हो गया था।
कर्मियों के साथ अधिकारियों तक का टोटा जिला पुलिस के पास
जिले की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा एक एसपी के साथ चार डीएसपी, 14 इंस्पेक्टर, 30 सब इंस्पेक्टर, 99 सहायक सब इंस्पेक्टर एवं 1100 कांस्टेबल पर है। जिले में 13 पुलिस स्टेशनों के माध्यम से जिले की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने का दावा किया जाता है। लेकिन इन थानों एवं पुलिस पोस्ट में न पर्याप्त अधिकारी मौजूद हैं और न ही पुलिस के जवान। ऐसे में कानून व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती है। जिले में 18 इंस्पेक्टर की पोस्ट के मुकाबले 14, 38 सब इंस्पेक्टर की पोस्ट पर 27, 99 एएसआई की जगह 86, 169 हेड कांस्टेबल 167 एवं 943 कांस्टेबल की प्रस्तावित पोस्ट की बजाय 802 कांस्टेबल ही तैनात है। यह स्थिति पुरुष पुलिसबल की है। इधर महिला पुलिस बल में तीन सब इंस्पेक्टर, 08 एएसआई के स्थान पर 5 एवं 10 हेड कांस्टेबल के पदों पर 12 एवं 69 महिला कांस्टेबल की प्रस्तावित पोस्ट पर महज 64 महिला कांस्टेबल ही तैनात हैं।
सोमवार रात कुछ पुलिस कर्मचारी वापस आ गए हैं। यह सही है कि डेरा प्रकरण के दौरान अधिकतर फोर्स संवेदनशील जिलों में तैनात थी। मौजूद पुलिस कर्मचारियों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे प्रयास किए। व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेवात एवं अन्य स्थानों से पुलिस बल रेवाड़ी बुलाया गया था।
-गजेंद्र शर्मा, डीएसपी हेडक्वार्टर, रेवाड़ी।